कोविड संक्रमित मरीजों की जान बचाने के लिए पुलिस ने प्लाज़्मा दान का सराहनीय कदम उठाया है। इस संबंध में पुलिस लाइन में गोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान जिले के 64 पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों ने प्लाज़्मा दान करने की इच्छा जताई है। 

कोरोना काल में कर्तव्यनिष्ठा व दृढ़ता से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के दौरान कई पुलिसकर्मी भी संक्रमित भी हुए। उपचार के बाद ठीक होकर दोबारा अपने कर्तव्यों पर लौटे। ऐसे ही पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ रविवार को एसएसपी योगेंद्र सिंह रावत ने गोष्ठी की। इस दौरान उनके स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी ली गई।

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अधिकारियों, कर्मचारियों को कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए बनी एसओपी के अनुसार खुद का बचाव करते हुए अपने कर्तव्यों का निवर्हन करने के निर्देश दिए। लोगों की सहायता के लिए स्वेच्छा से प्लाज़्मा डोनेट करने के लिए प्रेरित किया गया। एसएसपी योगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि इस समय दून पुलिस का प्रत्येक कोरोना वारियर्स हर मोर्चे पर जनता की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है।

गोष्ठी में मौजूद 64 पुलिस अधिकारी, कर्मचारियों ने प्लाज्मा देने के लिए स्वेच्छा से एंटीबॉडी टेस्ट कराने की हामी भरी। उक्त गोष्ठी के दौरान एसपी सिटी सरिता डोबाल, एसपी देहात स्वत्रंत कुमार, एसपी क्राइम प्रकाश चंद्र आर्य, के अलावा सभी पुलिस क्षेत्राधिकारी, कोविड कंट्रोल रूम से निरीक्षक नदीम अतहर और निरीक्षक प्रदीप बिष्ट मौजूद रहे।

कोरोना के इलाज में इस्तेमाल दवाओं की कमी नहीं
आयुक्तालय खाद्य संरक्षा व औषधि प्रशासन की ओर से बताया गया है कि प्रदेश में कोविड-19 महामारी की रोकथाम व इलाज में लाई जाने वाली विभिन्न दवाओं की कोई कमी नहीं है। राज्य में पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध है। अब तक राज्य में 19787 रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति हुई है। राज्य की अधिकतर औषधि निर्माण इकाइयां औषधि का निर्माण कर रही हैं। उन्हें यह भी निर्देशित किया गया है कि राज्य में आवश्यक औषधियों की उपलब्धता बनाए रखें।

स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने कहा कि मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी और बेस अस्पताल कोटद्वार में एक सप्ताह के भीतर ऑक्सीजन प्लांट लगेगा। जबकि अन्य प्रस्तावित स्थानों पर केंद्र सरकार की ओर से प्लांट की सप्लाई होते ही जल्द ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाएंगे।

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उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में एक अप्रैल 2020 को ऑक्सीजन की खपत आठ मीट्रिक टन थी। जबकि एक अप्रैल 2021 में इसकी खपत 15 से 20 मीट्रिक टन बढ़ गई है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि वर्तमान में खपत 100 मीट्रिक टन है। जैसे-जैसे ऑक्सीजन बेड की संख्या बढ़ेगी खपत भी बढ़ेगी।

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