योगी सरकार की कैबिनेट मंत्री कमलरानी वरुण का रविवार को आकस्मिक निधन हो गया है। उन्होंने पीजीआई लखनऊ में अंतिम सांस ली है। ऐसा बताया जा रहा है कि कोरोना संक्रमण के चलते उनकी मौत हुई है।

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लखनऊ में ली अंतिम सांस

गौरतलब है कि मंत्री कमलारानी को पहले से ही डायबिटीज, हाइपरटेंशन व थायराइड से जुड़ी समस्या थी। कोरोनावायरस संदिग्ध होने पर 17 जुलाई को कमल रानी वरुण का सैंपल लिया गया था। 18 जुलाई को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह कानपुर के घाटमपुर से विधायक थीं। शनिवार को उनकी हालत अचानक बिगड़ गई. उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर शिफ्ट किया गया। आज सुबह करीब 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने जताया शोक

उनके निधन पर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भी शोक व्यक्त किया है। CM योगी ने ट्वीट किया, ‘उत्तर प्रदेश सरकार में में मेरी सहयोगी, कैबिनेट मंत्री श्रीमती कमल रानी वरुण जी के असमय निधन की सूचना, व्यथित करने वाली है।प्रदेश ने आज एक समर्पित जननेत्री को खो दिया। उनके परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं. ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें। ॐ शांति!’

उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भी किया ट्वीट

उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भी कमल रानी के निधन पर शोक व्यक्त किया है. UP कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, ‘बेहद दु:खद खबर। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री श्रीमती कमल रानी वरुण का आज निधन हो गया, वो कोरोना से संक्रमित थीं। विनम्र श्रद्धांजलि. ईश्वर इस दुख की घड़ी में उनके परिजनों को दुख सहने का साहस दें।’

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जानिए कैसे बनी हाउसवाइफ से मंत्री

कमलरानी का जन्म 3 मई 1958 को लखनऊ में हुआ था। कमलरानी ने समाजशास्त्र से एमए किया। 25 मई 1975 को उनकी शादी एलआईसी के प्रशासनिक अधिकारी किशनलाल वरुण से हुई थी। किशनलाल आरएसएस से जुड़े थे। बहू के रूप में कमलरानी ने 1977 से राजनीति की शुरुआत की। पति के प्रोत्साहन से उन्होंने आरएसएस द्वारा मलिन बस्तियों में संचालित सेवा भारती के सेवा केन्द्र में बच्चों की शिक्षा, गरीब महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और बुनाई का प्रशिक्षण कार्य शुरु किया। राजनीति में सक्रियता के चलते वर्ष 1989 में वह भाजपा के टिकट पर कानपुर के द्वारिकापुरी वार्ड से चुनाव लड़कर विजयी रहीं। इसके बाद वह इसी सीट से वर्ष 1996 में दोबारा पार्षद हुईं।

घाटमपुर से बनी सांसद

राजनीति में सक्रियता के चलते भाजपा ने उन पर बड़ा दांव आजमाया और उन्हे घाटमपुर लोकसभा से टिकट दे दिया गया पार्टी के विश्वास पर खरी उतरी कमलरानी इस सीट से सांसद हुई। वर्ष 1998 में वह फिर से इस सीट से सांसद चुनी गईं लेकिन 1999 में वह इस सीट से महज 585 वोटों से चुनाव हार गईं। बतौर सांसद उन्होंने महिला सशक्तीकरण, पर्यटन मंत्रालय, संसदीय सलाहाकर समितियों में काम किया।

वर्ष 2012 में कमलरानी ने घाटमपुर के बजाए कानपुर देहात की रसूलाबाद सीट से विधान सभा का चुनाव लड़ीं लेकिन वह जीत नही सकीं, इस बीच पति के निधन के बाद वह एक बार फिर से घाटमपुर की राजनीति में सक्रिय हुईं तो तमाम दावेदारों को किनारे हटाकर भाजपा ने एक बार फिर से कमलरानी पर ही दांव लगाया और फिर से कमलरानी पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए भारी मतों से घाटमपुर से विधायक चुनी गईं। उनकी इसी मेहनत व पार्टी के विश्वास का नतीजा है था कि बीते वर्ष अगस्त माह में उन्हे कैबिनेट मंत्री बनाकर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा का कार्यभार दिया गया।

कानपुर में होगा अंतिम संस्कार

मंत्री कमला रानी वरूण का पार्थिव शरीर लखनऊ से सीधे कानपुर जाएगा। वहां पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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