यूएई ने अपने पहले अंतरग्रहीय मिशन की शुरुआत रविवार को जापान के एक प्रक्षेपण केंद्र से की। यूएई का एक अंतरिक्ष
यान अमल मंगल ग्रह की सात महीनों की यात्रा पर निकल गया। यान का नाम ‘अमल’ है, जिसका अरबी भाषा में मतलब
होता है उम्मीद।

इसके प्रक्षेपण से पृथ्वी के पड़ोसी ग्रह मंगल तक पहुंचने के लिए एक रेस की शुरुआत हो गई है। इस रेस में कुछ ही दिनों
बाद चीन और अमेरिका भी शामिल होंगे।

खराब मौसम की वजह से पहले टला था प्रक्षेपण
अमल का प्रक्षेपण सुबह 6:58 पर जापान के तानेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज के एक एच-IIए रॉकेट
से किया गया। पहले इसका प्रक्षेपण 15 जुलाई को किया जाना था लेकिन खराब मौसम की वजह से पांच दिन टाल दिया
गया था। मित्सुबिशी ने बाद में बताया कि अमल रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग हो गया था और अब मंगल की तरफ बढ़
गया है।

अंतरिक्ष केंद्र के लोगों में दिखे खुशी के आंसू
दुबई के मुहम्मद बिन राशिद अंतरिक्ष केंद्र में पारंपरिक सफेद कंडोरा पोशाक पहने अमीराती पुरुषों ने और काले अबाया
पहनी महिलाओं ने प्रक्षेपण को देखा।इस प्रक्षेपण को देखने वाले पहले मंत्र मुग्ध से खड़े रहे और फिर खुश हो कर तालियां
बजाने लगे।एक महिला ने खुशी में कुछ यूं चिल्ला पड़ी जैसे शादियों के जश्न में चिल्लाते हैं।जैसे-जैसे उसके अलग चरण
हुए, केंद्र में बैठे पुरुषों के मुंह से जश्न की चीखें निकल गईं,वे तालियां बजाने लगे। एक को तो कोरोना वायरस महामारी
की वजह से पहने हुए अपने मास्क से अपने आंसू पोंछते हुए भी देखा गया।

यूएई की 50वीं वर्षगांठ पर मंगल पर पहुंचने की उम्मीद
प्रक्षेपण के करीबी डेढ़ घंटे बाद मिशन के निदेशक ओमरान शरफ ने पत्रकारों को बताया कि अमल कुछ सिग्नल भेज रहा है
जिनका बाद में अध्ययन किया जाएगा, लेकिन इस समय सब ठीक लग रहा है। अमल के फरवरी 2021 में मंगल पर
पहुंचने की उम्मीद है। उसी महीने में यूएई के गठन की 50वीं वर्षगांठ भी मनाई जाएगी। शरफ ने बताया कि सितंबर
2021 में अमल मंगल के वायुमंडल का डाटा भेजना शुरू कर देगा, जिसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ साझा
किया जाएगा।

छोटी गाड़ी के आकार के बराबर है अमल
यूएई के वैज्ञानिकों ने यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी
में शोधकर्ताओं के साथ काम किया।अंतरिक्ष यान को बोल्डर में असेंबल किया गया और जापान भेजा गया।अमल को
बनाने और अंतरिक्ष में भेजने में 20 करोड़ डॉलर लगे। मंगल पर काम करने का खर्च अलग है, जिसे अभी जाहिर नहीं
किया गया है।अमल का आकार लगभग एक छोटी गाड़ी के बराबर है। ये कम से कम दो साल तक मंगल के चक्कर लगाता
रहेगा। इसमें तीन उपकरण लगे हुए हैं जो मंगल के ऊपरी वायुमंडल का अध्ययन करेंगे और जलवायु परिवर्तन का
निरीक्षण करेंगे।

यूएई का मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने का लक्ष्य
यूएई की अंतरिक्ष संस्था के प्रमुख मुहम्मद अल अहबाबी ने तानेगाशिमा से एक संयुक्त ऑनलाइन समाचार वार्ता में
बताया, "यूएई अब इस क्लब का सदस्य बन गया है और देश अब और ज्यादा जानेगा, और ज्यादा प्रयास करेगा और
अपने अंतरिक्ष खोजी अभियान को विकसित करता रहेगा." अगर मंगल मिशन सफल रहा तो ये अंतरिक्ष में अपना
भविष्य तलाश रहे यूएई के लिए एक बड़ा कदम होगा। देश के पहले एस्ट्रोनॉट हज्जा अली अलमंसूरी को अंतरिक्ष में भेजे
हुए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है। यूएई का 2117 तक मंगल पर इंसानों को बसाने का लक्ष्य है। यूएई ने अमल के
लिए सब कुछ खुद न करके करने साझेदार को चुना।

पृथ्वी का निरीक्षण कर रही हैं तीन सैटेलाइट
यूएई अंतरिक्ष विकास में एक नया खिलाड़ी है, लेकिन वो पृथ्वी का निरीक्षण करने वाली तीन सैटेलाइटों को
सफलतापूर्वक ऑर्बिट में भेज चुका है।इनमें से दो का विकास साउथ कोरिया ने किया था और प्रक्षेपण रूस ने किया था।
तीसरी सैटेलाइट यूएई ने खुद बनाई थी जिसका प्रक्षेपण जापान ने किया था।

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