उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या में आवंटित की गई पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद निर्माण के लिए बुधवार को इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के नौ सदस्यों के नामों की घोषणा कर दी है। इसमें मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध वर्ग व जानी-मानी हस्तियों को शामिल किया जाएगा। यह ट्रस्ट अयोध्या में मिली पांच एकड़ भूमि पर मस्जिद, अस्पताल, रिसर्च सेंटर सहित अन्य जरूरी सुविधाओं का निर्माण करेगा।

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फारुकी होंगे ट्रस्ट के अध्यक्ष

सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर अहमद फारुकी ने बताया कि आवंटित की गई पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद, रिसर्च सेंटर, लाइब्रेरी और अस्पताल के निर्माण के लिए ‘इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन’ नाम से एक ट्रस्ट बनाया गया है। इसमें वे खुद संस्थापक ट्रस्टी होंगे। बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी इसके पदेन प्रतिनिधि होंगे।

 

ट्रस्ट में होंगे 15 सदस्य

बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन नाम से मस्जिद निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया था। इस ट्रस्ट में 15 सदस्यों को शामिल किया जाना है, जिसमें से नौ सदस्यों की घोषणा बुधवार को कर दी गई। वहीं बाकी 6 लोगों के नाम की घोषणा भी जल्द की जाएगी।

 

ट्रस्ट के सदस्यों नाम इस प्रकार है

1- सुन्नी वक्फ बोर्ड सीईओ- फाउंडर ट्रस्टी

2- जुफर अहमद फारुकी- चीफ ट्रस्टी/अध्यक्ष

3- अदनान फारुख शाह, गोरखपुर- ट्रस्टी/उपाध्यक्ष

4- अतहर हुसैन, लखनऊ- ट्रस्टी/सचिव

5- फैज आफताब, मेरठ- ट्रस्टी/कोषाध्यक्ष

6- मोहम्मद जुनैद सिद्दीकी, लखनऊ- सदस्य

7- शेखर सउद्दुज्जमान, बांदा- सदस्य

8 मोहम्मद राशिद, लखनऊ- सदस्य

9- इमरान अहमद, लखनऊ- सदस्य

 

हालांकि ट्रस्ट में अयोध्या से जुड़े किसी भी व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया हैं, जिससे उनमें रोष उत्पन्न हुआ हैं। इसके अलावा राम जन्म भूमि विवाद में मुस्लिम पक्षकार रहें इकबाल अंसारी का नाम भी ट्रस्ट में नहीं है। बता दें कि संतो की तरफ़ से अब सुन्नी वक़्फ़ और ट्रस्ट में सरकार की तरफ़ से अधिकारिक नियुक्ति करने की मांग की जा रही है।

 

अगले महीने शुरू होगा निर्माण कार्य

रजा ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ही यह तय करेगा की इस मस्जिद का निर्माण कब और कैसे करना है। मोहसिन रजा ने यह भी कहा कि फिलहाल सुन्नी बोर्ड का कार्यकाल खत्म हो गया है इसलिए नए कार्यकाल के गठन के पहले उनका 6 महीने का एक्सटेंशन दिया गया है ताकि वह मस्जिद से जुड़े फैसले ले सके। आवंटित की गई 5 एकड़ जमीन पर मस्जिद, इंडो इस्लामिक रिसर्च सेंटर, लाइब्रेरी और अस्पताल का निर्माण कराया जाएगा। अब बोर्ड ने एक ट्रस्ट का गठन किया है, जो मस्जिद निर्माण से लेकर अन्य कार्यों की देखरेख करेगी। माना जा रहा है कि ट्रस्ट भी अगले महीने मस्जिद निर्माण कार्य शुरू कर सकता है।

जनसहयोग से बनेगी मस्जिद

सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा कि अब जल्द ही ट्रस्ट का परमानेंट एकाउंट नम्बर यानि पैन हासिल किया जाएगा, फिर उसका बैंक खाता खुलवा कर, आयकर से 80जी व अन्य औपचारिकताएं पूरी करवाई जाएंगी। इसके बाद ट्रस्ट उस जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करने के लिए जनसहयोग से धनराशि संकलित करना शुरू करेगा।उन्होंने कहा कि ट्रस्ट किसी भी तरह केन्द्र या राज्य सरकार से इस निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग नहीं मांगेगा।

 

सुप्रीम कोर्ट ने आवंटित की थी 5 एकड़ जमीन

नवंबर, 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार मस्जिद बनाने के लिए सरकार ने वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन आवंटित किया था। रिलीज के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यूपी सरकार ने मस्जिद के लिए अयोध्या के धन्नीपुर, रौनाही में पांच एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड को आवंटित किया था, जिसे फरवरी 2020 में हमने स्वीकार कर लिया। यह जमीन राम जन्मभूमि से लगभग 25 किलोमीटर दूर लखनऊ हाईवे पर स्थित है। ये इलाका एनएच-28 से सटा हुआ है, साथ ही यह मुस्लिम बाहुल्य क्ष्रेत्र भी है।

 

फिलहाल कृषि विभाग के पास है भूमि 

अयोध्या से करीब 20 किलोमीटर दूर रौनाही गांव में इस जमीन के पास धन्नीपुर, शेखपुर जाफर की सरहद है. यहां शाहगदा शाह हजरत की दरगाह भी है.यहाँ पर हर वर्ष उर्स का मेला लगता है। कोरोना के चलते इस बार उर्स नहीं हो पाया था। मस्जिद को लेकर अभी निर्माण जैसी कोई हलचल शुरू नहीं हुई है,हालांकि गांव वाले जरूर उत्साहित  दिखें। गांव के लोगों का कहना है कि वो जल्द से जल्द मस्जिद का निर्माण शुरू होते देखना चाहते हैं, इससे इलाके की तस्वीर पलटने से उनकी किस्मत भी बदलेगी,साथ ही दूर दूर से लोग यहां आएंगे।

धन्नीपुर में मिली पांच एकड़ भूमि फिलहाल कृषि विभाग के पास है।कृषि विभाग इस पर भूमि पर धान की रोपाई करा चुका है।

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