राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने 12वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान पुस्तक के एक पाठ में संशोधन करते हुए इसमें से जम्मू कश्मीर में अलगाववादी राजनीति पर पैराग्राफ को हटा दिया है और पिछले वर्ष प्रदेश के विशेष दर्जे को खत्म करने का संक्षिप्त उल्लेख किया है। बता दें कि पिछले वर्ष 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त करते हुए प्रदेश को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया था।

क्षेत्रीय आकांक्षाओ के तहत शामिल किया गया नया पाठ

एनसीईआरटी ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिये पाठ्य पुस्तक में ”स्वतंत्रता के बाद भारत की राजनीति” पाठ में संशोधन किया है। पाठ से अलगाववाद और उसके आगे को हटा दिया गया है जबकि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के विषय को ” क्षेत्रीय आकांक्षाओं” विषय के तहत शामिल किया गया है।

क्या कहा गया है संशोधित अंश में?

संशोधित अंश में कहा गया है, ”5 अगस्त 2019 को संसद ने अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त विशेष दर्जे को समाप्त करने को मंजूरी दी । राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया- बिना विधानसभा के लद्दाख और इसके सहित जम्मू कश्मीर।” जम्मू कश्मीर के बारे में संशोधित अंश में कहा गया है कि भारत के संविधान के तहत जम्मू कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा प्राप्त था। इसके बावजूद क्षेत्र में हिंसा, सीमापार आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता देखी गई जिसके आंतरिक एवं बाह्य प्रभाव थे। इस अंश में कहा गया है कि अनुच्छेद के परिणामस्वरूप निर्दोष नागरिकों, सुरक्षा बलों सहित काफी जानों का नुकसान हुआ । इसके अलावा कश्मीर घाटी से काफी मात्रा में कश्मीरी पंडितों का विस्थापन हुआ।

पाठ्यक्रम में 2002 के बाद जम्मू कश्मीर में होने वाली घटनाओं का भी जिक्र

संशोधित पाठ्यपुस्तक में 2002 के बाद से जम्मू कश्मीर में होने वाले घटनाक्रमों का जिक्र किया गया है। पाठ में जून 2018 में लगाए गए राष्ट्रपति शासन का भी जिक्र है जब भाजपा ने महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया था । इसके अंत में अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाने का उल्लेख किया गया है।

कोरोना वायरस के कारण कोर्स में कटौती

एनसीईआरटी ने कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण मौजूदा 

शैक्षणिक वर्ष के लिए 9वीं से 12वीं कक्षा का पाठयक्रम 30 प्रतिशत कम करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत कक्षा 9 से 12वीं तक के सभी विषयों के सिलेबस में कटौती की गई है। पाठ्यक्रम में सीबीएसई द्वारा की गई इस कटौती का असर 11वीं कक्षा में पढ़ाए जाने वाले संघीय ढांचा, राज्य सरकार, नागरिकता, राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे अध्याय पर दिखेगा। सीबीएसई ने इन सभी अध्यायों को मौजूदा एक वर्ष के लिए सिलेबस से हटा दिया है। वहीं 12वीं कक्षा के छात्रों को अब इस मौजूदा वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था का बदलता स्वरूप, नीति आयोग, जीएसटी जैसे विषय नहीं पढ़ाए जाएंगे। यह कटौती केवल मौजूदा शैक्षणिक वर्ष तक सीमित रहेगी।

सिलेबस कट पर राजनीति और सरकार का जवाब

एनसीईआरटी के कोर्स में बदलाव किए जाने पर अब जमकर राजनीति भी हो रही है। दिल्ली सरकार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सीबीएसई के इस कदम पर प्रश्न उठाए हैं। एक वर्ष के लिए पाठ्यक्रम में किए गए इस बदलाव के उपरांत विभिन्न व्यक्तियों और राज्य सरकारों द्वारा प्रश्न खड़े किए गए हैं। केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने इनके जवाब में कहा, ‘सिलेबस में कटौती को लेकर बिना जानकारी के कई तरह की बातें कही जा रही हैं। ये मनगढ़ंत बातें केवल सनसनी फैलाने के लिए की जा रही हैं। शिक्षा में राजनीति नहीं होनी चाहिए, शिक्षा को इससे दूर रखना चाहिए।’

पहले भी हुआ था विवाद

गौरतलब है कि इससे पहले इसी महीने एक विवाद उस समय उत्पन्न हो गया था जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कोविड-19 के कारण पाठ्यक्रम में कटौती की थी और विपक्ष ने आरोप लगाया था कि एक विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिये भारतीय लोकतंत्र और बहुलतावाद पाठ को हटाया गया।

हालांकि, बोर्ड ने जोर दिया कि यह केवल इस अकादमिक वर्ष के लिये है और केवल एक विषय तक ही सीमित नहीं है जैसा कि कुछ लोगों द्वारा पेश किया जा रहा है।

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