मोहम्मद रफी को भारतीय संगीत जगत के नायाब हीरे के रूप में आज भी याद किए जाते हैं, उन्होंने 56 साल की उम्र तक 26,000 गानों का रिकॉर्ड बनाया हैं, और आज भी यह रिकॉर्ड कोई तोड़ नहीं पाया है। रफी साहब को छह बार फिल्मफेयर अवॉर्ड और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

 

remembering mohammad rafi


शहंशाह-ए-तरन्नुम कहे जाने वाले मोहम्मद रफी की आज 40 वीं पुण्यतिथि है। 31 जुलाई 1980 में हार्ट अटैक आने के कारण उनका निधन हो गया था।

 

मोहम्मद रफी भले ही इस दुनिया में न हो लेकिन उनके सदाबहार गानें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

 

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ किया था आखिरी गाना

भारतीय फिल्म जगह में उन्होंने 26 हजार से भी ज्यादा गानों की पंक्तियों को अपनी आवाज़ ही हैं। मोहम्मद रफी ने कई लोगों के साथ गानें गए हैं लेकिन प्यारेलाल जी से उनका विशेष लगाव था। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने मोहम्मद रफी से अपने निर्देशन में 369 गानें गवाए थे। उनका आखिरी गाना भी प्यारेलाल जी के साथ रिकॉर्ड किया गया था। यह बेहतरीन गाना फिल्म आस-पास के लिए गाया गया था। यह फिल्म धर्मेंद्र के ऊपर फिल्माई गई थी। इस गाने के बोल “शाम फिर क्यों उदास है दोस्त, तू कहीं आसपास है दोस्त”।

 

फकीर की नकल कर सीखा गाना 

मशहूर गायक रफी साहब ने  शुरुआत में प्रोफेशनल तालीम लेने के बजाए उन्होंने एक फकीर से गाना-गाना सीखा, उसके बाद उन्होंने उस्ताद अब्दुल वहीद खां, पंडित जीवन लाल मट्टू और फिरोज निजामी से शास्त्रीय संगीत की तालीम ली। रफी साहब ने कई ऐसे गानें और नगमें गाईं हैं, जो हमेशा के लिए अजर अमर हो गईं हैं।

 

रफी साहब इस चीज़ से करते थे सख्त नफरत

जानकर आपको जरूर हैरानी होगी कि जहां आजकल पब्लिसिटी स्टंट के लिए तैयारियां की जाती हैं वहीं मोहम्मद रफी इस बात से दूर रहते थे। किसी शादी में भी जाते तो कभी ड्राइवर से गाड़ी पार्क नहीं करवाई वो इसलिए क्योंकि वो तोहफा, बधाई दे तुरंत घर लौट लेते थे।

 

गानें के अलावा और क्या था पसंद

रफी साहब को गानें के साथ- साथ स्पोर्ट्स काफी पसंद था। वो खाली समय में बैडमिंटन और पतंग उड़ाना पसंद करते थे।

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