भारत के राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप के रूप में पांच विमान सोमवार को फ्रांस से रवाना हुए और अब वो संयुक्त अरब अमीरात के अल दफ्रा एयरबेस पर पहुंच गए हैं। विमानों को फ्रांस से यूएई पहुंचने में सात घंटों का वक्त लगा। ये विमान अल दफ्रा एयरबेस से उड़ान भरेंगे, तो सीधे भारत के अंबाला में लैंड करेंगे। भारत को यह लड़ाकू विमान ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब उसका पूर्वी लद्दाख में सीमा के मुद्दे पर चीन के साथ गतिरोध चल रहा है।

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राफेल के लिए फ्रांस से हुई 59 हजार करोड़ रुपए की डील

 

भारत ने वायुसेना के लिये 36 राफेल विमान खरीदने के लिये चार साल पहले फ्रांस के साथ 59 हजार करोड़ रुपये का करार किया था।

वायुसेना के बेड़े में राफेल के शामिल होने से उसकी युद्ध क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की उम्मीद है।

 

राफेल पाकिस्तान के F-16 &JF-17 से ज्यादा ताकतवर

 

Rafale Jets को लेकर रिटायर्ड एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार ने कहा है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न होते, तो आज हमारे पास राफेल नहीं होता। सोमवार को उनकी यह टिप्पणी तब आई, जब इन विमानों की पहली खेप के तौर पर पांच जेट्स फ्रांस से भारत के लिए रवाना हुए हैं। नांबियार बोले- विमानों में इस वक्त राफेल सबसे बढ़िया एयरक्राफ्ट है। पाकिस्तान के पास जो F-16 & JF-17 हैं, उनसे अगर इनकी तुलना की जाएगा तो कोई बड़ी/गंभीर बात नहीं होगी।

 

राफेल से जुड़ी 10 खास बातें

 

1. राफेल अत्याधुनिक हथियारों से लैस है, प्लेन के साथ मेटेअर मिसाइल भी है। विमान में फ्यूल क्षमता- 17,000 किलोग्राम किलोग्राम है. पहले तय किया गया था कि राफेल के ट्रायल के लिए स्पाइस 2000 बम की जरूरत हो सकती है, इसलिए इसकी डिलीवरी में देरी हुई।

 

2. राफेल की अधिकतम स्पीड 2,130 किमी/घंटा है बताया जा रहा है कि राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। जबकि स्कैल्प मिसाइल की रेंज 300 किलोमीटर है।

 

3. राफेल डीएच (टू-सीटर) और राफेल ईएच (सिंगल सीटर), दोनों ही ट्विन इंजन, डेल्टा-विंग, सेमी स्टील्थ कैपेबिलिटीज के साथ चौथी जनरेशन का फाइटर है। ये न सिर्फ फुर्तीला है, बल्कि इससे परमाणु हमला भी किया जा सकता है।

 

4. इस फाइटर जेट को रडार क्रॉस-सेक्शन और इन्फ्रा-रेड सिग्नेचर के साथ डिजाइन किया गया है। इसमें ग्लास कॉकपिट है. इसके साथ ही एक कम्प्यूटर सिस्टम भी है, जो पायलट को कमांड और कंट्रोल करने में मदद करता है।

 

5. राफेल में एक एडवांस्ड एवियोनिक्स सूट भी है। इसमें लगा रडार, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन सिस्टम और सेल्फ प्रोटेक्शन इक्विपमेंट की लागत पूरे विमान की कुल कीमत का 30% है।

 

6. इस जेट में आरबीई 2 एए एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार लगा है, जो लो-ऑब्जर्वेशन टारगेट को पहचानने में मदद करता है। राफेल का रडार सिस्टम 100 किमी के दायरे में भी टारगेट को डिटेक्ट कर लेता है।

 

7. राफेल सिंथेटिक अपरचर रडार (SAR) भी है, जो आसानी से जाम नहीं हो सकता, जबकि इसमें लगा स्पेक्ट्रा लंबी दूरी के टारगेट को भी पहचान सकता है। किसी भी खतरे की आशंका की स्थिति में इसमें लगा रडार वॉर्निंग रिसीवर, लेजर वॉर्निंग और मिसाइल एप्रोच वॉर्निंग अलर्ट हो जाता है और रडार को जाम करने से बचाता है।

 

8. राफेल में आधुनिक हथियार भी लगे हैं. जैसे- इसमें 125 राउंड के साथ 30 एमएम की कैनन है। ये एक बार में साढ़े 9 हजार किलो का सामान ले जा सकता है।

 

9. राफेल फाइटर जेट को माली अफगानिस्तान, इराक और लीबिया में इस्तेमाल किया जा चुका है। राफेल फाइटर जेट में भारतीय वायुसेना के हिसाब से फेरबदल किए गए हैं यानी इंडियन एयरफोर्स के हिसाब से ये बिल्कुल सटीक है।

 

10. अंबाला एयरबेस चीन की सीमा से 200 किमी की दूरी पर है,  यहीं पर, राफेल 17वीं स्क्वाड्रन गोल्डन एरोज राफेल की पहली स्क्वाड्रन होगी। इसमें ताकतवर एम 88 इंजन लगा हुआ है।

राफेल भारतीय वायु सेना के 17 वें स्क्वाड्रन ‘Golden Arrows’ का हिस्सा बनेगा जो राफेल विमान से सुसज्जित पहला स्क्वाड्रन है।

 

वायुसेना के पायलट लेकर आएंगे राफेल

 

फ्रांस से यूएई के यात्रा के दौरान राफेल विमान के साथ हवा में ईंधन भरने वाले 2 refuler भी आएंगे। भारतीय वायु सेना के पायलट जिन्होंने राफेल विमान के उड़ान की ट्रेनिंग ली है वही विमान उड़ाकर लेकर भारत आएंगे। 29 जुलाई को राफेल विमान को औपचारिक रूप से भारतीय वायु सेना में अम्बाला में शामिल किया जाएगा।

 

फ्रांस में होगी पायलटों की ट्रेनिंग

 

भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते के अनुसार, दोनों देशों को कुल 36 वायुसेना पायलटों को फ्रेंच एविएटर्स द्वारा राफेल लड़ाकू जेट पर प्रशिक्षित किया जाना है। जहां अधिकांश वायुसेना के पायलटों को फ्रांस में प्रशिक्षित किया जाएगा, वहीं कुछ भारत में अभ्यास करेंगे। खास बात ये है कि इन विमानों को भारतीय पायलट ही उड़ाकर ला रहे हैं। पहली खेप में भारत को 10 लड़ाकू विमान डिलीवर किए जाने थे लेकिन विमान तैयार न हो पाने की वजह से फिलहाल पांच विमान भारत पहुंचेंगे। बयान में कहा गया है कि सभी 36 विमानों की आपूर्ति 2021 के अंत तक पूरी हो जाएगी।

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