प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 7 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने इस संबोधन में अपने विचार रखते हुए बताया कि कैसे नई शिक्षा नीति देश के लिए लाभदायक होगी। भारत के लोगों को और भी ताकतवर बनाने के लिए यह नई शिक्षा नीति मदद करेगी। यह संबोधन उन्होंने 11 बजे शुरू किया था। इस पूरे संबोधित में एक बात पर जोर देते हुए कहा कि अब वॉट टू थिंक नहीं अब हाऊ टू थिंक पर फोकस किया जा रहा है।

 

संबोधन में कहीं ये बातें 

■  प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां कहीं भी सुधार की जरूरत है वो हम सभी को मिलकर करना है। आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति से सीधे तौर पर जुड़े हैं। इसलिए आप सभी की भूमिका भी अहम है। जहां तक पॉलिटिकल विल की बात है, मैं  आपके साथ हूं।

 

■ देश शिक्षा व्यवस्था को नेशनल वैल्यूज के साथ जोड़ते हुए नेशनल गोल्स के अनुसार रिफॉर्म्स करते हुए आगे बढ़ता है। जिससे एजुकेशन सिस्टम वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढियों का भी फ्यूचर तैयार कर सके। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21 वीं सदी की भारत की फाउंडेशन तैयार कर रही है।

 

■ कई सालों से शिक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं किए गए हैं जिसके चलते समाज में इनोवेशन, क्यूरोसिटी और इमेजिनेशन की वैल्यू खत्म होती जा रही है। डॉक्टर, इंजीनियर या वकील की होड़ से बाहर निकला जरूरी है। जब तक पैशन और पर्पस नहीं होंगे तब तक क्रिटीकल और इनोवेटिव थिंकिंग डेवलप नहीं होगी।

 

■ गुरुवर रविन्द्रनाथ की पुण्यतिथि पर उनके विचारों को याद करते हुए कहते हैं कि ‛उच्च शिक्षा हमारे जीवन को सद्भाव में लाती है।’ राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भी इसी से जुड़ा है। अब समय यह है कि हमें टुकडों में सोचने की जगह होलिस्टिक अप्रोच करना होगा।

 

फिलहाल अभी के लिए तो यह बड़ा सवाल है कि शिक्षा व्यवस्था युवाओं को क्यूरोसिटी और कमिटमेंट मोटिवेट करती है या नहीं ? ऐसे को सवाल हैं जो पॉलिसी बनाते समय सामने आए थे जिनपर गंभीरता से काम हुआ है।

 

■ नई व्यवस्थाओं के साथ नया स्टैंडर्ड भी तय हो रहा है। इसलिए एजुकेशन सिस्टम में भी बदलाव जरूरी था। स्कूल को नए सिस्टम 10+2 से आगे बढ़ाना नई दिशा की ओर कदम है। हमें स्टूडेंट्स को ग्लोबल सिटीजन भी बनाना है। साथ ही ध्यान भी रखना है कि वो जमीनी स्तर से भी जुड़े रहें। घर और स्कूली भाषा एक होने से सीखने में गति आएगी। संभव हो सके तो 5 वीं तक के बच्चों को मातृभाषा में ही पढ़ाई करवाई जाए जिससे बच्चों की नींव मजबूत होगी।

 

■ अभी तक कि व्यवस्थाओं में वॉट टू थिंक पर ध्यान दिया जा रहा था। अब हाऊ टू थिंक पर फोकस किया जा रहा है। सभी जानकारी आपके मोबाइल पर है लेकिन उसमें से जरूरी जानकारी क्या है यह अहम है। इस तरह ढेर सारी किताबों की जगह इंक्वायरी, डिस्कवरी, डिस्कशन, एनालिसिस पर जोर दिया जाएगा।

 

■ ज्यादातर ऐसा होता है कि जब हम जॉब के लिए जाते है। तो पता चलता है कि जो अब तक पढ़ा वो जॉब की जरूरतों को पूरा नहीं करता। इस सभी चीजों का ख्याल रखते हुए मल्टीपल एंट्री, एग्जिट का ऑप्शन दिया है। अब स्टूडेंट्स जॉब की जरुरतों के हिसाब से पढ़ाई कर सकेंगे।

 

■ कोर्स में अगर कोई भी स्टूडेंट बीच में छोड़ कर दूसरे कोर्स में जाना चाहता है तो यह भी अब संभव हो सकेगा। आज हम मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के लंबी दूरी के सोच से बाहर आए हैं। अब हम ऐसे युग की तरफ बढ़ रहे हैं जहां कोई एक प्रोफेशन से टिका नहीं रहेगा, अब खुद को रीस्किल और अपस्किल करने की जरूरत है।

 

■ कोडिंग पर फोकस करें या रिसर्च पर यह एजुकेशन सिस्टम के साथ पूरे समाज की अप्रोच बदलने का जरिया बन सकता है। वर्चुअल कॉन्सेप्ट शिक्षा को बेहतर लेवल देगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति एजुकेशन और रिसर्च के बीच के गैप को खत्म करने में अहम भूमिका निभाएगा। आज इनोवेशन और एडेप्शन की वैल्यू हमारे समाज में निर्मित करना चाहते हैं। यह हमारे इंस्टीट्यूशन में शुरू होने जा रही है।

 

■ भारत का टैलेंट भारत की पीढ़ियों का विकास करे इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है, साथ ही टीचर्स की ट्रेनिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। आई बिलीव वेन ए टीचर लर्न, ए नेशन लीड। राष्ट्र शिक्षा सर्कुलर नहीं है इसके लिए मन बनाना पड़ेगा। अब प्रयासों को, पूरी शताब्दी को दिशा मिलने वाली है।

 

क्या है शिक्षा नीति ? 

सरकार ने 30 जुलाई को नई शिक्षा नीति घोषित की थी। इसमें एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े खास बदलाव किए गए हैं। साथ ही देश के निजी और सरकारी स्कूलों को साथ जोड़ने की बात भी कही गई है। ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा दिया गया है साथ ही 10 साल के अंदर और भी बदलाव होने की संभावना है।

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