pluto planet science news the india rise news 1930 में प्लूटो को ढूंढा गया तो इसे बड़े ही सम्मान के साथ ग्रह का दर्जा दिया गया था। हालांकि खगोलविदों का एक वर्ग शुरुआत से ही इसे ग्रह मानने के खिलाफ रहा था।  प्लूटो का एक रंग नहीं है इस कई रंगों का मिश्रण है। इस तरह है मिश्रण किसी अन्य ग्रह में नहीं पाए जाते हैं। 


आज ही के दिन (24 अगस्त 2006) अंतरिक्ष के सबसे बौने ग्रह खगोलीय पिंड प्लूटो को सौरमंडल से बाहर कर दिया गया था। प्लूटो को तब तक सौरमंडल का नौवां ग्रह माना जाता था। ग्रहों को सौरमंडल में शामिल करने के लिए वोटिंग हुई। इसके लिए प्राग में करीब ढाई हजार एस्ट्रोनॉमर मौजूद थे। ग्रहों को सौरमंडल में शामिल करने के लिए तीन मानक तय किए गए थे।

 

1- ग्रह सूर्य की परिक्रमा करता हो

 

2- ग्रह का आकार इतना हो कि अपनी ग्रेविटी के कारण वह गोलाकार हो जाए 

 

3- अपना ऑर्बिट हो, यानी कि इसमें इतना जोर हो कि यह बाकी पिंडों से अलग अपनी स्वतंत्र कक्षा बना सके। 

 

तीसरे मानक पर प्लूटो खरा नहीं उतरा और उसे सौरमंडल के ग्रहों की गिनती से अलग कर दिया गया था।

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● जब 1930 में प्लूटो को ढूंढा गया तो इसे बड़े ही सम्मान के साथ ग्रह का दर्जा दिया गया था। हालांकि खगोलविदों का एक वर्ग शुरुआत से ही इसे ग्रह मानने के खिलाफ रहा था।

 

● बता दें कि प्लूटो दूसरा सबसे बौना ग्रह है इसके अलावा भी एक और ग्रह है। इसे ग्रहों की श्रेणी में 2003 यूबी 313 और सीरीज भी शामिल है। 

 

● प्लूटो को बौना ग्रह क्यों कहा जाता है ? इसका व्यास लगभग 2370 किमी है।

 

● प्लूटो का एक रंग नहीं है इस कई रंगों का मिश्रण है। इस तरह है मिश्रण किसी अन्य ग्रह में नहीं पाए जाते हैं। 

 

● प्लूटो के पांच उपग्रह है। इसका सबसे बड़ा उपग्रह 1978 में शेरन खोजा गया था। इसके बाद हायडरा निक्स 2005 में खोजे गए। कर्बेरास 2011 वहीं सीटक्स को 2012 में खोजा गया था।

 

● प्लूटो का वायुमंडल ज्यादा पतला हैं। यह मीथेन, नाइट्रोजन, और कार्बन मोनोऑक्साइड से बना है। जब प्लूटो सूर्य की परिक्रमा करते समय दूर चला जाता है तब वह ठंडा पड़ने लगता है। पाई जाने वाली गैसें इसपर बर्फ की परत जमाने लगती हैं। इस वजह से प्लूटो का वायुमंडल और भी विरला हो जाता है। जैसे ही प्लूटो सूर्य के पास आता है गैसों का कुछ हिस्सा पिघल कर वायुमंडल में फैलने लगता है।

 

248 साल में लगता है सूर्य का एक चक्कर

रोम के अंधेरे के देवता को प्लूटो कहते हैं। इस ग्रह पर अंधेरा होने के कारण इसे प्लूटो कहा जाता है। इसे सूर्य का एक चक्कर लगाने में  248 साल लग जाते हैं। हमारे यहां एक दिन 24 घंटे का होता है। ठीक उसी तरह प्लूटो के लिए 24 घंटे 153.36 घंटे के बराबर होता है। यानी यहां दिन रात के बदले केवल 6 दिन होते हैं।

 

दोबारा मिली प्लूटो को मान्यता 

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (National Aeronautics & space Administration) ने प्लूटो को एक बार फिर ग्रह की मान्यता दी है। NASA के चीफ जिम ब्राइडनस्टिन (Jim Bridenstine) ने प्लूटो को सौरमंडल (Solar System) का एक ग्रह (Planet) माना है। NASA का कहना है कि इसका आकार छोटा होने पर भी यह एक ग्रह है।

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