लक्ष्मी निवास मित्तल ( Lakshmi Niwas Mittal )भारत के जाने माने अमीर बिजनेस मैन में से एक हैं । लक्ष्मी मित्तल आर्सेलर मित्तल नाम की कंपनी के चेयरमैन तथा सीईओ हैं । आर्सेलर मित्तल को दुनिया की सबसे बड़ी स्टील बनाने वाली कंपनी मानी जाती है । इसलिए इन्हे “किंग ऑफ स्टील” के नाम से भी पुकारा जाता है । इनके पास आर्सेलर मित्तल कंपनी का कुल 38% मालिकाना हक है , इसके अलावा वह क्वींस पार्क रेंजर्स कंपनी में भी 20% के हिस्सेदार हैं ।

Lakshmi Niwas Mittal
लक्ष्मी निवास मित्तल

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प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा

लक्ष्मी निवास का जन्म 15 जून 1950 में सादुलपुर , राजस्थान में एक मदवाड़ी परिवार में हुआ । इनके पिता का नाम मोहनलाल मित्तल था , जो खुद एक निप्पोन डेनरो इस्पात नाम की कम्पनी में स्टील का व्यापार करते थे । लक्ष्मी मित्तल की पत्नी का नाम उषा मित्तल है और इनके दो बच्चों के नाम वनिषा मित्तल और आदित्य मित्तल है ।


लक्ष्मी मित्तल की पढ़ाई 1957 से 1964 तक श्री दौलतराम नोपानी विद्यालय , कैलकटा से हुई । इसके बाद उन्होंने अपने स्नातक स्तर की पढ़ाई सेंट जेवियर कॉलेज से की जो की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलकटा से संबद्ध है । वहाँ से इन्होंने बी.काम में फर्स्ट क्लास से डिग्री प्राप्त की ।


26 साल की उम्र में इन्होंने अपनी पहली स्टील फैक्ट्री पीटी इस्पत इंडो की शुरुवात सिडोराजो , ईस्ट जावा , इंडोनेशिया में की क्यों की 1976 में भारत सरकार ने स्टील के उत्पादन पर नियंत्रण लगाना शुरू कर दिया था । 1989 में त्रिनिदाद और टोबैगो नाम के राज्य के स्वामित्व कंपनी घाटे में चली गई थी जिसके बाद लक्ष्मी मित्तल ने उसे खरीद कर एक ही साल में लाभदायक उद्यम में बदल दिया ।

1990 तक मित्तल परिवार की पारिवारिक सम्मपत्ति में सिर्फ कोल्ड रोलिंग शीट जो की नागपुर में स्थित है और पुणे के पास स्थित एलॉय प्लांट थे । किंतु आज के समय में उनके पास ये दोनों कंपनी के साथ साथ मुंबई के पास एक बड़ा इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट भी है जो की लक्ष्मी मित्तल के दो छोटे भाई प्रमोद मित्तल और विनोद मित्तल द्वारा चला जाता है ।

निजी धन

2005 में लक्ष्मी मित्तल ने डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम रोड , नई दिल्ली में 30 मिलियन डॉलर का कोलोनिया बंगलो खरीदा और वह एक घर बनाया । इस सड़क को सबसे विशेष सड़क मना जाता है क्यों की यहाँ ज्यादातर रहने वाले लोग अरबपति हैं ।


2016 के संडे टाइम्स के अनुसार लक्ष्मी मित्तल और उनके परिवार के पास कुल 7.12 बिलियन पाउंड था जो की 2014 की तुलना में 2.08 बिलियन डॉलर काम था । वहीं फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार लक्ष्मी मित्तल को 135 वां अमीर बिलियनेयर बताया गया था । वहीं 2008 में फोर्ब्स के अनुसार इन्हे दुनिया का चौथा सबसे अमीर व्यक्ति बताया गया था ।

विवाद

2002, प्लेड सिमरू के सांसद एडम प्राइस को मित्तल की एल.एन.एम. स्टील कंपनी के समर्थन में रोमानियाई सरकार को टोनी ब्लेयर द्वारा लिखा गया पत्र मिला, जो रोमानिया के राज्य के स्वामित्व वाले उद्योग को खरीदने के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया में था , इस रहस्योद्घाटन ने विवाद पैदा कर दिया , क्योंकि मित्तल ने पिछले वर्ष ब्रिटिश लेबर पार्टी को 125,000 पाउंड दिए थे। भले ही ब्लेयर ने एक ब्रिटिश कंपनी के “सफलता का जश्न” के रूप में अपने पत्र का बचाव किया , लेकिन उनकी आलोचना की गई क्योंकि एल.एन.एम. को डच एंटिल्स में पंजीकृत किया गया था और यूके में इसके कर्मचारियों के 1% से भी कम कार्यरत थे । एल.एन.एम. ब्रिटेन के अपने संघर्षरत इस्पात उद्योग का एक प्रमुख वैश्विक प्रतियोगी था ।

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ब्लेयर के पत्र ने संकेत दिया कि फर्म और मित्तल को बिक्री के निजीकरण से रोमानिया के यूरोपीय संघ में प्रवेश के लिए रास्ता सुगम हो सकता है । इसके पास एक मार्ग भी था , जिसे ब्लेयर के हस्ताक्षर करने से ठीक पहले हटा दिया और मित्तल को “एक मित्र” के रूप में वर्णित किया।

सम्मान और पुरस्कार

लक्ष्मी मित्तल को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है जैसे –
1996 में उन्हें न्यू स्टील के तरफ से स्टील मेकर ऑफ द ईयर का खिताब मिला था ।
2004 में उन्हें फोर्ब्स मैगजीन के तरफ से यूरोपियन बिजनेस मैन ऑफ द ईयर , द वॉल स्ट्रीट जर्नल के तरफ से एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर और अमेरिकन मेटल मार्केट एंड वर्ल्ड स्टील डायनामिक्स के तरफ से 8 वं ऑनरेरी विली कोर्फ स्टील विजन का अवार्ड मिला ।


2007 में उन्हें किंग्स कॉलेज लंदन के तरफ से फेलोशिप मिला और आई.ओ.एम. 3 के तरफ से एक बेसेमर गोल्ड मेडल मिला ।
2008 में इन्हे भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया और एक बार फिर फोर्ब्स मैगजीन ने इन्हे फोर्ब्स लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया ।

सामाजिक कल्याण के लिए किए गए कार्य

हाल ही में चल रहे कोविड महामारी के दैरान लक्ष्मी मित्तल ने 2020 में 100 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री देखभाल कोष में देश वासियों के देखभाल के लिए दान किए ।
इसके पहले 2008 में उन्होंने 15 मिलियन पाउंड का दान लंदन के ग्रेट ओरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल में किया । इस अस्पताल को ये अब तक का सबसे बड़ा निजी योगदान प्राप्त हुआ है । इस दान का उपयोग अस्पताल वालों ने
मित्तल चिल्ड्रेन्स मेडिकल सेंटर में लगाया जहां ये लोगों को नई सुविधाएं देते और उनकी सहायता करते हैं ।


2003 में लक्ष्मी मित्तल की पत्नी उषा मित्तल के नाम पर चल रहा उषा मित्तल फाउंडेशन , खुद लक्ष्मी मित्तल और राजस्थान सरकार ने मिल कर जयपुर , राजस्थान में एल. एन. एम. इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की स्थापना की जो की एक गैर लाभदायक संगठन है ।
2009 में फिर से उषा मित्तल फाउंडेशन भारतीय विद्या भवन के साथ मिल कर उषा लक्ष्मी मित्तल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की स्थापना नई दिल्ली में की ।
लक्ष्मी निवास मित्तल फाउंडेशन के द्वारा किए गए एक बड़े दान के बाद एस.एन.डी.टी. विमेंस यूनिवर्सिटी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर विमेन का नाम बदल कर उषा मित्तल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रख दिए ।


2000 ओलंपिक्स में भारत ने सिर्फ एक ब्रोंज मेडल और 2004 ओलंपिक्स में एक सिल्वर मेडल जीता जिससे देख के लक्ष्मी मित्तल ने 9 मिलियन डॉलर लगा कर मित्तल चैंपियन ट्रस्ट की स्थापना की जहां सबसे बढ़िया दस खिलाड़ियों को अच्छी ट्रेनिंग दी जाए । इसके बाद 2008 में उन्होंने अभिनव बिंद्रा को निशाने बाजी में पहला गोल्ड मेडल मिलने पर 1.5 करोड़ रुपए से पुरस्कृत किया था । ये भारत देश के नाम पर सबसे पहला गोल्ड मेडल था ।
2012 में ओलंपिक्स के लिए आर्सेलर मित्तल ने आर्सेलर मित्तल ऑर्बिट बनाने के लिए स्टील भी उपलब्ध करवाए थे ।

लश्मी मित्तल बर्कलेस प्रीमियरशिप क्लब विगन और एवर्टन को खरीदने और बेचने के लिए एक प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे थे । 20 दिसंबर 2007 को मित्तल परिवार ने क्वींस पार्क रेंजर्स फुटबॉल क्लब में 20% की हिस्सेदारी खरीदी थी ।
कॉमिक रिलीफ के लिए उन्होंने सेलेब्रिटी स्पेशल बी. बी. सी. कार्यक्रम , द अप्रेंटिस के लिए 1 मिलियन पाउंड जुटाए ।

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