सच्ची लगन से कोई भी काम करो तो उसमे सफलता जरूर मिलती है । इस बात को बहुत लोगों ने सच कर दिखाया है । आज तक किसी को भी रातों रात सफलता नहीं मिली है , उसे पाने के लिए कई दिनों की मेहनत लगती है । यह कहानी भी एक ऐसे ही मेहनती इंसान की है , जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से आज ऐसी कंपनी की शुरुआत की है जिसे देश के बच्चे बच्चे जानते हैं । बायजू‌ रवींद्रन , BYJU’s  कंपनी के फाउंडर और सी. ई. ओ. हैं । BYJU’s एक प्रौद्योगिकी फर्म है जिसका स्लोगन “फॉल इन लव विथ लर्निंग” है ।

प्रारंभिक जीवन
बायजू‌ रवींद्रन का जन्म 1980 में केरेला के अजिकोड नामक गांव में हुआ था । इनके पिता जी का नाम भी रवींद्रन और माता का नाम सोभनव अल्ली है । और वह दोनों प्रोफेशन से एक टीचर थे । बायजू‌ का कभी भी पढ़ाई में मन नहीं लगता था । उन्हें पढ़ाई से ज्यादा फुटबॉल खेलना पसंद था और उनके लिए यह बहुत अच्छी बात थी की उनके माता पिता ने भी उनपर पढ़ाई को ले कर कभी जोर नहीं दिया । एक टीचर होने के नाते वह यह बात अच्छे से समझते थे की एक बच्चा क्लास रूम के अंदर से ज्यादा बाहर सीखता है ।

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BYJU’sने अपनी स्कूली शिक्षा मलयालम मीडियम स्कूल से पूरी की । शुरुआत से ही बायजू‌ गणित में काफी तेज थे  और टी. वी. पर क्रिकेट की कमेंट्री सुन कर उनकी अंग्रेजी भी अच्छी हो गई थी ।
स्कूल खत्म करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और उनकी एक विदेशी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी भी लग गई थी जहां उन्हें एक अच्छी खासी सैलरी मिलने लगी थी ।

BYJU’s की शुरुआत
दो साल तक नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी । नौकरी करने के दौरान ही किसी कारण वश उन्हें बैंगलोर आना पड़ा । बैंगलोर में पहले से ही उनके कुछ दोस्त सी. ए. टी. की तैयारी कर रहे थे । क्योंकि बायजू की गणित अच्छी थी उनके दोस्तों ने उनसे मदद मांगी । दोस्तों की मदद करते करते उन्हे भी इसके बारे में समझ हो गई थी और उन्होंने भी सी. ए. टी. का एग्जाम दे दिया । और 100 परसेंटाइल का अंक भी स्कोर कर लिया लेकिन उनका एम. बी. ए. करने का कोई इरादा नहीं था इसलिए वह वहां से वापस आ गए ।

फिर 2005 में वे दुबारा से बैंगलोर गए तब उनके कुछ और दोस्तों ने उनसे दुबारा मदद मांगी । इस बार वह छह हफ्तों के लिए बैंगलोर गए थे और इतने समय में उन्होंने केवल अपने दोस्तों की ही नहीं , बल्कि और 1000 बच्चों की तैयारी कराई थी ।

शुरू में उन्होंने फ्री में लोगों को वर्कशॉप दिए थे लेकिन अगर लोग उसे आगे कंटिन्यू करना चाहते थे तो वह उन्हें पैसे भी देते थे । लोगो को उनके क्लासेज बहुत पसंद आने लगे थे इसलिए उन्होंने टीचिंग में ही कुछ अच्छा और बड़ा करने का विचार किया । इस विचार पर अच्छे से काम करने के लिए ही उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी और अलग अलग जगहों पर जा कर लोगो को पढ़ने का काम शुरू कर दिए थे । उनके पढ़ने का तरीका लोगो को बहुत अच्छा लगता था और उनके स्टूडेंट्स की संख्या भी बढ़ने लगी थी जिससे वह अच्छा खासा पैसा भी कमा लेते थे ।

ऊंचे लेवल के बच्चो को पढ़ते समय बायजू को यह एहसास हुआ की भारत में एजुकेशन का बेस सही नहीं है । इसलिए उन्होंने स्कूल के बच्चों को भी पढ़ना शुरू कर दिया और 2011 में “थिंक एंड लर्न” नाम की एक कंपनी की शुरुआत की । इस कंपनी में भी बायजू ने काफी तरक्की की । और इसे और बढ़ाने के लिए उन्होंने 2015 में BYJU’S LEARNING APP की शुरुआत की जो की एक ऑनलाइन ट्यूटोरियल और कोचिंग फर्म है । पहले ही साल में उन्होंने इसमें भी काफी सफलता हासिल कर ली । एक साल में ही इस एप को 55 लाख लोगो ने डाउनलोड कर लिया था ।  BYJU’S का मुख्य उद्देश्य कक्षा 1 से 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए ऑनलाइन वीडियो लेक्चर के माध्यम से कोचिंग प्रदान करना है साथ ही ऐसे लोगो के लिए भी जो आई. आई. टी. – जे. ई. ई. , एन. ई. ई. टी. , सी. ए. टी. , जी. आर. ई. और जी. एम. ए. टी. जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं ।

कंपनी की ग्रोथ को देखते हुए BYJU’S को काफी सारे इन्वेस्टर्स भी मिल गए थे । 2017 में जहां कंपनी की रेवेन्यू 260 करोड़ों थी वहीं एक साल में उसकी रेवेन्यू 520 करोड़ पहुंच गई थी । और आज इसकी रेवेन्यू कुल 37, 000 करोड़ रुपए है । और इसमें कुल 3200 एम्प्लॉय हैं ।BYJU’S नोएडा , गुड़गांव और अन्य क्षेत्रों में कक्षा कोचिंग भी प्रदान करती है ।

BYJU’S ने बहुत ही कम समय में काफी तरक्की कर ली है । 2016 में यह एशिया की पहली कंपनी बन गई थी , जिसने फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रिसिला चान की एक पहल चान जुकरबर्ग इनिशिएटिव से फंडिंग प्राप्त की ।

2017 में BYJU’S पर एक केस स्टडी में इसे हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पाठ्यक्रम में चित्रित किया गया था । यह वास्तव में एक गैर मैद्रिक दृष्टिकोण से किसी भी कंपनी के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है । और इसके बाद से ही BYJU’S ने एक ग्लोबल मंच पर काम करना शुरू कर दिया था ।

BYJU’S एक प्रीमियम व्यवसाय मॉडल पर काम करता है जिसमे यह ग्राहकों को कंप्लीमेंट्री और पेइड दोनों सेवाए प्रदान करती है । कंपनी छात्रों से आवेदन या वेबसाइट पर अपना विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहती है और उन्हें 15 दिनों का निशुल्क परीक्षण प्रदान करती है ।

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एक बार निशुल्क परीक्षण समाप्त हो जाने के बाद , छात्र को पूरी सामग्री तक पहुंचने के लिए BYJU’S से पाठ्यक्रम खरीदना होता है । कंपनी अपने ग्राहकों को एक से एक सलाह देती है और बच्चों के माता पिता को भी बच्चों की प्रतिक्रिया देती है । लेकिन कठिनाइयों का सामना तो हर किसी को करना ही पड़ता है और BYJU’S को भी करना पड़ता है । शुल्क परीक्षण समाप्त होने के बाद छात्रों को पेइड सबस्क्राइबर्स के लिए परिवर्तित करना BYJU’S के लिए एक बड़ी चुनौती है ।

कंपनी अन्य देशों में विस्तार करने की दिशा में भी काम कर रही है , और इस विस्तार में सहायता के लिए उपयुक्त साझेदार ढूंढना BYJU’S के लिए दूसरी चुनौती है ।

बायजू‌ रवींद्रन ने अकेले ही एक ऐसी कंपनी खड़ी कर दी है जिसने बहुत ही कम समय में काफी मुनाफा कमा लिया है । यह कंपनी एक तरह से लोगों को शिक्षा प्रदान कर समाज को आगे बढ़ाने का काम कर रही है जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं । यह एक बेहतरीन स्टार्टअप कंपनियों में से एक बन गई है ।

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