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भारत- चीन विवाद के बाद अब चीन की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। एक तरफ भारत ने डिजिटल स्ट्राइक कर चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया है वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के मुद्दे पर बीजिंग को घेर रहा है। इतना काफी नहीं था कि अब जापान और चीन के रिश्ते में दरार पड़ती दिख रही है।

 

दरअसल मामला यह है कि जापान ने कह दिया है कि वह उन कंपनियों को सब्सिडी देगा जो चीन के बजाए आसियान देश (ASEAN nations) में अपने सामान को तैयार करेंगी। जापान ने इस लिस्ट में भारत और बांग्लादेश को  शामिल किया है।

 

जापान ने यहां तक कहा है कि अगर जापानी निर्माता चीन के बजाए आसियान देश (ASEAN nations)  में अपने सामान को तैयार करेंगे तो उन्हें सब्सिडी भी दी जाएगी।

 

निक्केई के रिपोर्ट के मुताबिक जापान विशेष क्षेत्र से अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है। जापान अब एक ऐसी प्रणाली का निर्माण करना चाहता है जो ख़ासतौर से इलेक्ट्रॉनिक और चिकित्सा की स्थिति को आपूर्ति प्रदान करने में सक्षम हो।

 

चीन के बजाए भारत और बांग्लादेश के साथ आसियान देशों में शिफ्ट करने पर जापान की इकोनॉमी, ट्रेड व इंडस्ट्री मंत्रालय वित्तीय मदद देगा। जिसका बजट 23.5 अरब येन रखा गया है। जापानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इच्छुक कंपनियां प्रोत्साहन और मदद के लिए आवेदन कर सकेंगी।

 

जापान सप्लाई चेन के लिए चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहता है। कोरोना महामारी के दौरान जापान को चीन से मिलने वाले कच्चे माल की आपूर्ति ठप हो गई थी। इसलिए जापान चाहता है कि विभिन्न देशों में जापानी कंपनियों की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट हो जिससे इमरजेंसी के समय जापान इलेक्ट्रानिल्स और दवाओं के कम्पोनेंट की आपूर्ति कर सके।

 

कई जापानी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के मुताबिक जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन व भारत सरकार के अधिकारियों के बीच होने वाली बैठक में कई जापानी कंपनियों ने भारत आने में अपनी दिलचस्पी जाहिर की है।

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