कोराना से बड़ा देशविरोधी इस वक्त कोई हो नहीं सकता। पूरे विश्व में कोरोना ने अपनी रफ्तार बढ़ा ली है।
किलर कोरोना को देश में आए 175 दिन हो चुके हैं। देश की भलाई और देशवासियों की सुरक्षा को मद्देनजर
रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को 21 दिनों का पहला देशव्यापी लॉकडाउन घोषित कर दिया था।

भारत में लॉकडाउन के पांच चरण थे
पहला- 25 मार्च से 14 अप्रैल (21 दिन)
दूसरा- 15 अप्रैल से 3 मई (19 दिन)
तीसरा- 4 मई से 14 मई (14 दिन)
चौथा- 18 मई से 31 मई (14 दिन)
पांचवां- 1 जून से 30 जून (30 दिन)

आंकड़ों के मुताबित इतने लंबे समय तक लॉकडाउन रखने वाला भारत पहला देश है। विश्वभर में प्रधानमंत्री
मोदी के इस लिए गए फैसले की सराहना की जा रही है। लेकिन अर्थव्यवस्था पर पड़ती गहरी चोट को देख
सरकार ने अनलॉक फेज की घोषणा की थी। लेकिन आर्थिक गतिविधियों को डगमगाता देख सरकार ने
गाइडलाइन जारी कर अब अनलॉक को भी हटा दिया है।

सरकार के इस फैसले के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था को वापस पहरी पर लौटते देखा जा रहा है। सरकार
और आरबीआई के ताजा संकेतों के मुताबिक यह साफ है, कि भारत में अर्थव्यवस्था में सुधार को देखा जा
सकता है। यहां तक की गूगल कोविड-19 की मोबिलिटी रिपोर्ट भी यह इशारा कर रही है कि आर्थिक क्षेत्र में
बदलाव हो रहे हैं।

हर महीने गूगल तैयार करता है मोबिलिटी रिपोर्ट
वैसे तो गूगल हर महीने रिपोर्ट तैयार करता है लेकिन कोराना के संक्रमण के बाद से लोग गूगल की
मोबिलिटी रिपोर्ट पर ध्यान देने लगे हैं। गूगल की यह मोबिलिटी रिपोर्ट बताती है कि किस जगह लोगों की
गतिविधियों में कितना परिवर्तन हुआ है। मोबिलिटी रिपोर्ट में खासतौर पर रिटेल एंड रिक्रियेशन, मनोरंजन,
ग्रॉसरी एंड फार्मेसी, ट्रांजिट स्टेशन, वर्कप्लेस और आवासीय जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
गूगल की नई मोबिलिटी रिपोर्ट की माने तो 1 जून से कई अच्छे बदलाव देखे गए हैं। खासतौर पर ग्रॉसरी एंड
फार्मेसी सेक्टर में वद्धि देखी गई है।

पाई गई सबसे अधिक तेजी
• रिटेल एंड रिक्रिएशन
• ग्रॉसरी एंड फार्मेसी
• ट्रांजिट स्टेशन
• आवासीय

कैसे तैयार करता है गूगल मोबिलिटी रिपोर्ट
यह रिपोर्ट आपके मोबाइल के लोकेशन के आधार पर तैयार की जाती है। जैसे आप किसी जगह (मेडिकल,
रेस्टोरेंट्स) जाते हैं और आपका लोकेशन ऑन है तो गूगल आपके विजिट को स्टोर करेगा और इस स्टोर के
माध्यम से गूगल की मोबिलिटी रिपोर्ट जारी करता है जो भारत समेत देश के 131 देशों में जारी होती है।

सरकार के आंकड़ो के मुताबिक
लॉकडाउन के हटने के बाद से जीडीपी में तेजी को बढ़ते देखा गया है। वित्तमंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों
के मुताबिक जून में कोरोना संक्रमण के दौरान केंद्र सरकार का जीडीपी संग्रह 90,917 करोड़ रुपए रहा है। जो
कि 2019 की तुलना में 91 प्रतिशत है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में औद्योगिक उत्पादन में 60 फीसदी
तक गिरावट देखी गई है। जो कि मई जून में 35 फीसदी से नीचे आ गई है। वहीं विनिर्माण क्षेत्र में बीते अप्रैल
68 फीसदी तक कि गिरावट देखी गई हैं। लेकिन आईआईपी के आंकड़ों के मुताबिक मध्य जून तक 40
फीसदी गिरावट को दर्ज किया गया है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक
द हिन्दू के बिजनेस लाइन के सीनियर डिप्टी एडिटर शिशिर सिन्हा ने बताया कि ‛हम बिल्टी यानी ईबे रसीद
से भी स्थिति के सुधार का अनुमान लगा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ईबे रसीद तब जारी की जाती है जब
कोई सामान एक राज्य से दूसरे राज्य या एक ही राज्य में समान को अलग-अलग भेजा जाता है। इससे यह
पता चलता है कि समान पर टैक्स दिया गया है या नहीं इस समय ईबे रसीद जारी होने की संख्या कोविड-19
से पहले की स्थिति में पहुंचती दिख रही है। पहले (कोरोना महामारी से पहले) 20 से 25 लाख ईबे प्रतिदिन
जारी होती थीं’

भारत मे 57 फीसदी सेवा क्षेत्र, औद्योगिकी 30 फीसदी वहीं कृषि 13 फीसदी जीडीपी के हिस्सेदारी में आता
है। कहा यह जाता है कि कृषि भारत के रीढ़ की हड्डी है। सबसे ज्यादा भारत में खेती को प्राथमिकता दी जाती
है साथ ही अर्थव्यवस्था को बचाने में ग्रामीणों का एक बड़ा योगदान रह सकता है। दरअसल ग्रामीण इलाकों
में कोरोना का प्रभाव कम पाया गया है। जिस वजह से रबी की फसल की कटाई निरंतर चल रही है। हालांकि
पिछले आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 के अनाज का रिकॉर्ड उत्साहित करने वाला था। पिछले रिकॉर्ड में 30
करोड़ टन का उत्पादन हुआ था। एक्सपर्ट्स की मानें तो कोरोना महामारी से हुई आर्थिक तंगी से कृषि बचा
सकता है। देखा जाए तो देश में किसानों के हालत कुछ खास नहीं हैं राज्य सरकार ने किसानों को लॉकडाउन
की मार से बचाने के लिए राहत योजना भी चलाई है

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