अगर आप मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन पर ऑनलाइन क्लास के दौरान 20-20 खेलते रहें तो आपकी आंखें कभी खराब नहीं होंगी।
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द इंडिया राइज
अगर आप मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन पर ऑनलाइन क्लास के दौरान 20-20 खेलते रहें तो आपकी आंखें कभी खराब नहीं होंगी। 20-20 का मतलब किसी क्रिकेट मैच से नहीं है। आपको 20 मिनट तक लगातार स्क्रीन पर देखने के बाद करीब 20 सेकेंड तक कमरे में 10 से 20 फुट दूर रखी किसी चीज को देखना होगा। इससे आपकी आंखें कभी खराब नहीं होगी। यह कहना है कि शहर के जाने माने नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. अक्षत बास का।  

डॉ. अक्षत बॉस ने बताया कि ऑनलाइन स्टडी समय की जरूरत है। इससे भागा नहीं जा सकता। इसका हमारे पूरे शरीर पर असर पड़ता है। खासतौर पर आंखों पर बहुत गहरा असर होता है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से दिन भर थकान रहने, आंखों में धुंधलापन, आंखों में लाली, सिर और आंखों में दर्द की शिकायत हो सकती है। इससे कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम या डिजिटल विजन सिंड्रोम कहते हैं।

20 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए स्क्रीन टाइम
डॉ. अक्षत बॉस ने कहा कि स्क्रीन टाइम 20 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए। हर 20 मिनट के बाद हमें स्क्रीन से नजर हटाकर कमरे में रखी दूसरी चीजें देखनी चाहिए। इससे आंख की मांस पेशियों को राहत मिल जाएगी। इसके साथ ही हर 40 मिनट के बाद कम से कम 20 मिनट का ब्रेक लें। यह बेहद जरूरी है। खासतौर पर बच्चों के लिए।

कम से कम दो फुट दूर हो मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन
मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन की दूरी कम से कम दो फुट होनी चाहिए। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि जिस कमरे में बच्चे पढ़ने बैठे हैं यहां पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। रोशनी कम होने पर भी दिक्कत होती है।

बच्चा कैसे बैठ रहा है इस बात का रखें खास ख्याल
बच्चा पढ़ते वक्त कैसे बैठ रहा है इस बात का खास ख्याल रखें। स्क्रीन उसकी आंखों के सामने से 20 डिग्री नीचे होनी चाहिए। उसे टेड़ा-मेड़ा होकर न बैठने दें। ऐसा करेंगे तो बच्चे को तमाम तरह की दिक्कत हो सकती है। हम कैसे बैठकर पढ़ रहे हैं यह बात सबसे अहम है।

स्क्रीन देखते वक्त पलकें झपकाते रहें
स्क्रीन पर देखते वक्त उसमें खोएं नहीं, पलकों को लगातार झपकाते रहे। अगर आप ऐसा नहीं करते तो यह खतरनाक हो सकता है। कई लोगों की आंखें सूख जाती हैं। ऐसे में वो डॉक्टरों से सलाह करके कोई आई ड्रॉप ले सकते हैं।

धुंधलापन आ रहा है तो लॉकडाउन के बाद चेक करा लें आंखें
सबसे अहम बात, अगर आप चश्मा लगात हैं और ऑनलाइन पढ़ाई करने के दौरान अगर आपकी आंखों में धुंधलापन आ रहा है या आंखों और सिर में दर्द हो रहा है तो लॉकडाउन के बाद अपनी आंखें जरूर चेक करा लें। हो सकता है नंबर बढ़ गया हो। ऐसा हो यह जरूरी नहीं है। मगर एक बार चेक जरूर कराएं।

मोबाइल को भूले से भी पावर सेविंग मोड पर न रखें
मोबाइल कारोबारी और ट्रेक्नोक्रेट नरेन्द्र राना ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई के वक्त मोबाइल को भूले से भी पावर सेविंग मोड पर न रखें। न ही मोबाइल की ब्राइटनेस कम करें। यह ध्यान रखें कि बच्चा जिस कमरे में पढ़ रहा है उसमें पर्याप्त रोशनी हो। यह भी ध्यान रखें कि रोशनी सामने से न आकर पीछे से आए। जिससे बच्चा स्क्रीन को ठीक से देख सके।

बच्चों को आंखों के पास न लाने दें मोबाइल
नरेन्द्र राना ने बताया कि बच्चों को आंखों के पास मोबाइल न लाने दें। हो सके तो स्टैंड खरीद लें। जिस पर मोबाइल लगाने के बाद उसे बच्चे से कम से कम दो फुट की दूरी पर रखें। ऐसा करने से बच्चों की आंखों को नुकसान नहीं पहुंचेगा।

मोबाइल के रेजोल्यूशन का रखें खास ध्यान
सबसे अधिक ध्यान मोबाइल के रेजोल्यूशन का रखें। मोबाइल की स्क्रीन जितनी बेहतर होगी आंखों पर लोड उतना ही कम पड़ेगा। पैसे बचाने के लिए सस्ता मोबाइल न खरीदें। जो पैसा आप यहां बचाएंगे हो सकता है वो आपको बच्चों की आंखों का इलाज कराने में खर्च करना पड़े। कुल मिलाकर ऑनलाइन स्टडी के वक्त मोबाइल स्क्रीन से दूरी, कमरे की लाइन, बच्चों के बैठने के तरीके और मोबाइल स्क्रीन का ध्यान जरूर रखें।

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