अपने पूरे जीवन काल में आप एक ऐसे व्यक्ति से जरूर मिलते हैं जो किसी अन्य की तरह नहीं होता । दोस्ती एक लाख अलग अलग तरीकों से पैदा होती है , और सभी अच्छे दोस्त एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं । यह भी एक ऐसी ही दो दोस्तों की प्रेरणा दायक कहानी है जिन्होंने एक ही लक्ष्य निर्धारित किया और उसे हासिल करने में पूरी तरह से सक्षम भी हुए । यह कहानी है इमामी ग्रुप ( Emami ) के संस्थापक राधे श्याम अग्रवाल और राधे श्याम गोएंका की । जिन्होंने बचपन में ही साथ में बिजनेस करने का सपना देख लिया था । और आज वे दोनों ही एक सफल बिजनेस मैन में से एक हैं । 20 हज़ार रुपए से अपने बिजनेस की शुरुआत कर आज उन दोनो ने इसे 50,000 करोड़ तक पहुंचा दिया है ।

Emami

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प्रारंभिक जीवन

राधे श्याम अग्रवाल का जन्म 1946 में हुआ था वहीं उनके मित्र राधे श्याम गोएंका का जन्म 1947 में हुआ था । दोनो में बस एक साल का ही अंतर है । यह दोनो कोलकाता में पढ़े बढ़े हैं। उन दोनों ने अपनी प्राथमिक स्कूली शिक्षा महेश्वरी विद्यालय से पूरी की । स्कूल में पढ़ते समय ही उन दोनो में दोस्ती हुई जो की समय के साथ धीरे धीरे गहरी होने लगी थी । स्कूल खत्म होने के बाद दोनो ने एक ही कॉलेज में भी दाखिल लिया था । और उसी समय उन दोनो ने यह सोच लिया था की कॉलेज खत्म होने के बाद वे नौकरी करने के बजाए साथ में ही कोई बिजनेस करेंगे । बिजनेस की शुरुआत उन दोनों ने ग्रेजुएशन के दौरान ही कर दी थी । वे छोटे मोटे समान को पैक कर के बेचने का काम करने लगे थे । लेकिन बिजनेस के शुरुआती समय में उनके पास इसकी अच्छी समझ नहीं थी इसलिए वह इसमें बार बार असफल हो जा रहे थे और अंत में उनके पास पैसे भी नहीं बचते थे ।

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बिजनेस करने के अच्छी समझ लेने के लिए इन दोनो में खूब लगन थी जिसे राधे श्याम गोएंका के पिताजी ने देखी और उन दोनो की मदद करने के लिए उन्हें 20 हजार रुपए दिए । 1968 में उन 20 हजार को उन दोनों ने केमिकल बिजनेस में लगा दिया था जो की उधार पर चलता था । लेकिन सही से हिसाब खिताब न रखने और लापरवाही के कारण उनके पास उधार देने के पैसे नहीं बचे जिससे उनका इस व्यापार में भी टिके रहना मुस्किल हो गया था ।

इसलिए उन दोनो ने इस बिजनेस को बंद करने का फैसला लिया लेकिन एक बार फिर राधे श्याम गोएंका के पिता जी ने उन दोनो पर भरोसा दिखाया और उनकी आर्थिक तौर पर मदद करने के लिए उन्हें इस बार 1 लाख रुपए दिए ।

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इमामी ग्रुप की स्थापना

अपनी पुरानी गलतियों को ना दोहराते हुए और उनसे सीख लेते हुए उन दोनो ने इस बार “केमको केमिकल्स” नाम को कंपनी खोली और कुछ सस्ते कॉस्मेटिक्स को पैक कर बेचने का काम करने लगे । इस काम में पैसे कम थे परंतु काम चल रहा था । और इसी बीच इन दोनो का विवाह भी हो गया । विवाह होने के बाद उन दोनो की जिम्मेदारियां और साथ ही खर्चे बढ़ गए थे जिन्हे पूरा करना थोड़ा मुश्किल होने लगा था ।
इसी बीच उन्हें बिरला ग्रुप से एक अच्छे पद के लिए नौकरी का अवसर मिला जिसमे पैसे भी अच्छे थे । समय और हालत को देखते हुए उन दोनो ने इस अवसर को हाथ से जाने नहीं दिया और काम करने के लिए तैयार हो गए ।

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नौकरी करने के लिए वह तैयार तो हो गए थे लेकिन उन दोनो का बिजनेस करने का सपना अभी भी जिंदा था । करीब पांच साल तक नौकरी करने के बाद उन्होंने अच्छा खासा पैसा कमा लिया था और एक साथ ही उन दोनो ने नौकरी छोड़ दी । उन्होंने फिर से उसी बिजनेस में न जा कर कुछ अलग करने का सोचा ।
उस समय में इंपोर्टेड कॉस्मेटिक्स का काफी सनक था लेकिन उनके दाम इतने ज्यादा थे की आम जनता उन्हें खरीदने के बारे में सोच भी नहीं सकती थी । इसलिए उन्होंने अपने कंपनी के लिए एक एंपोर्टेड सा लगने वाला नाम इमामी सोचा । इस ब्रांड में उन्होंने कोल्ड क्रीम , वेनिशिंग क्रीम और टॉलकॉम पाउडर की शुरुआत की जो की बहुत जल्द ही पॉपुलर हो गए। उन्होंने नाम के साथ साथ प्रोडक्ट्स की पैकिंग को भी इंपोर्टेड रखा ।

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इमामी सबसे पहला ऐसा ब्रांड है जिसने टॉलकॉम पाउडर को प्लास्टिक के डब्बे में बेचना चालू किया , इससे पहले टॉलकॉम पाउडर टीन के डब्बे में आता था ।उस समय डब्बों पर उनके प्राइस नहीं लिखे जाते थे जिसका उन दोनो को बहुत फायदा मिला , वे पोंड्स और यूनिलीवर जैसी कंपनियों के दाम से कई अधिक दाम में अपने समान को बेचते थे । एक के बाद एक उन्होंने अपने कई प्रोडक्ट्स को लॉन्च किया और केवल चार साल में ही इमामी भारत का एक सफल ब्रांड बन गया ।

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पहले के समय में ब्रांडिंग और पैकेजिंग में किए गए उनके काम ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया और उनके लिए एक सबक भी बना जिसने उन्हें सफलता तक पहुंचा दिया ।
धीरे धीरे उन्होंने अपने ब्रांड के विज्ञापन को बड़े स्तर पर करना चालू कर दिया जिसके लिए उन्होंने बड़े बड़े सेलिब्रिटी को चुना ।बाद में उन्होंने कई क्षेत्र जैसे पेपर , एफ. एम. जी. सी. ,सीमेंट , रियल एस्टेट , एडिबल ऑयल , फार्मेसी और रिटेल में भी अपने बिजनेस का विस्तार किया ।


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कठिनाइयां

9 दिसंबर , 2011 की सुबह दक्षिण कोलकाता के धाकुरिया जिले में एक ए. एम. आर. आई. अस्पताल में आग लग गई , जिससे 92 लोगो की मौत हो गई जिसमे ज्यादातर गंभीर रूप से बीमार थे ओर कई लोगो का नींद में दम घुट गया । जिसके बाद अगले दिन अस्पताल का लाइसेंस रद कर दिया गया और बंगाल के मुख्यमंत्री ने इस घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए । जिसके बाद अस्पताल के सात सदस्यों को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया था जिसमे राधे श्याम अग्रवाल , राधे श्याम गोएंका इमामी के संस्थापक और अस्पताल श्रृंखला के निदेशक थे , जिन पर लापरवाही से मौत का आरोप लगाया गया था ।

बचपन से लेकर आज तक एक अच्छा दोस्त होने के नाते दोनो ने कभी भी एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा । एक सफल बिजनेस खड़ा करने के साथ साथ यह दोनो हमने दोस्ती के मायने भी समझते हैं । और एक प्रेरणा बन गए हैं । आज इमामी ग्रुप का नाम उन दोनो की मेहनत से ही प्रसिद्ध हुआ है ।

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