कई बार ऐसा देखा गया है कि रिश्तों की कोई मंजिल नहीं होती है, बीच में ही वे कहीं टूट जाते हैं और दोनों प्रेमियों के हिस्से में एकदूजे से अलगाव के सिवा कुछ नहीं आता है। कई बार रिश्ते के टूटने के पीछे परिस्थितियां जिम्मेदार होती है तो कई बार दो में से कोई एक व्यक्ति दगा दे जाता है। ऐसे में दूसरे व्यक्ति के लिए आगे बढ़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। यदि वह सामने वाले व्यक्ति के लिए अपने मन में नकारात्मक भावों को जगह देने लगता है तो वह एक अजीब किस्म के दलदल में फंसने लगता है, जो कि उसके लिए ही नुकसानदायक होता है। अगली स्लाइड्स से जानिए कि रिश्ता टूटने पर किन नकारात्मक भावों को अपने मन में स्थान नहीं देना चाहिए। 

बदले का भावना न रखें 
यह सबसे सामान्य नकारात्मक भावना है जो कि रिश्ता टूट जाने के बाद अधिकांश लोगों में देखी जाती है। जब लड़कियां धोखा देती हैं, तब तो यह कई सारे पुरुषों में यह चरम के स्तर पर होती है। लड़कियों में भी यह भाव आ जाता है, लेकिन वे ज्यादा कुछ कर नहीं पाती हैं लेकिन इस भाव से होने वाला सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह आपको पूरी तरह से नकारात्मक तो बनाता ही है, धीरे-धीरे आपके दिमाग को भी खोखला करने लगता है।

नफरत को न पनपने दें 
रिश्ता टूटने पर आपको अपने दिमाग को स्वयं से इस तरह ट्रेनिंग देनी होगी की जबतक प्यार किया, अच्छा समय गुजारा बहुत अच्छी बात है, अब सामने वाले को दुआ देकर छोड़ दो। यदि आप सामने वाले के लिए मन में नफरत का जहर घोलते हैं तो आपके लिए ही मुश्किल खड़ी हो जाएगी। नफरत के विचारों के सिवा आप किसी भी अच्छे विचार को स्थान नहीं दे पाओगे। आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा। 

दूसरों के लिए बुरा 
यदि आपका रिश्ता नहीं चल पाया तो उसके पीछे कई कारण हो सकते हैं लेकिन उसके लिए सामने वाले को बद्दुआ देना बिल्कुल ठीक नहीं है। यदि वो किसी और के साथ खुश है तो उसके विषय में बार-बार खुद का खून न जलाएं क्योंकि ऐसा करने से आप मानसिक रूप से अस्थिर तो होंगे ही साथ ही अपनी अन्य चीजों पर भी ध्यान नहीं दे पाएंगे इसलिए ये सब न करें। 

इर्ष्या का भाव न लाएं 
सामने वाला व्यक्ति जिसके भी साथ है, उससे खुद की तुलना करना या उससे इर्ष्या करना भी बिल्कुल ठीक नहीं है क्योंकि ऐसा करके आप खुद के साथ अन्याय कर रहे हैं। बेहतर यह है कि इस समय आप खुद को समय दें बजाय कि खुद के स्टेटस और अगले की स्टेटस आदि पर ध्यान दें। खुद को हीनभाव से न देखें। खुद को बार-बार जज करके कमजोर न होने दें। अपने आप पर और समय पर विश्वास रखें। 

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