कोरोना संक्रमण राजधानी में पैर पसार चुका है। कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने लाकडाउन लगा दिया है। लाकडाउन के चलते जरूरी काम वाले ही सड़क पर निकल रहे हैं। बगैर काम के घर से निकलने वालों पर पुलिस प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है। इस कारण सड़कों पर सन्‍नाटा पसरा हुआ है। मां

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सड़कों पर सिर्फ एंबुलेंस का सायरन सुनाई दे रहा है। ऐसे में प्रदेश के सबसे बड़े आंबेडकर अस्पताल की मुक्तांजलि शव वाहन चलाने वाले कोरोना योद्धा की भूमिका निभा रहे हैं। कोरोना से मरने वालों काे जब उनके परिजन हाथ नहीं लगा रहे हैं तो ऐसे में मुक्तांजलि चलान वाले उनको अंतिम संस्कार के लिए श्‍मशान घाट पहुंचाने का काम कर रहे हैं। आंबेडकर अस्पताल में मुक्ताजंलि चलाने वाले चैन दास कुर्रे ने बताया कि लाकडाउन के चलते वह पिछले एक माह से अपने दो साल के छोटे बच्चे से नहीं मिले हैं।

धमतरी नवांगांव निवासी चैनदास कुर्रे मां  ने बताया कि बोरिया खुर्द में किराये का मकान लेकर पत्नी और दो साल के बच्चे के साथ रहते हैं। पहले वह गांव में खेती बारी का काम करते थे। लेकिन पिछले तीन साल से आंबेडकर अस्पताल में मुक्ताजंलि शव चला रहे हैं। आंबेडकर अस्पताल में उनकी ड्यूटी सुबह आठ से रात आठ बजे तक है।

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ड्यूटी करके जब वह घर जाते थे तो सबसे पहले बच्चे को गोद में उठा लेते थे। लेकिन जब से कोरोना की दूसरी लहर आई है तब से वह अपने बच्चे से नहीं मिले। दो माह हो गया बच्चे को गोद में नहीं उठाया है। घर में वह जाने के पहले कपड़े को गर्म पानी में डालते हैं, उसके बाद गर्म पानी करके नहाते हैं।

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