पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम (A. P. J. Abdul Kalam) भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कही बातें हमेशा हमारा मार्गदर्शन करती रहेंगी, हमारा हौंसला बढ़ाती रहेंगी. देश के 11वें राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को शिलॉन्ग में लेक्चर देते वक्त दिल का दौरा पड़ने से हुआ था. कलाम भले ही देश की सर्वोच्च संवैधानिक कुर्सी पर विराजमान रहे, लेकिन उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी के साथ जीया, यही उनकी सबसे बड़ी खासियत थी।

 missile man, and his inspiration story
APJ Abdul kalam’s Death Anniversary

मिसाइल मैन के कुछ अनसुने किस्से

1.अखबार बेचते थे कलाम

डॉ. कलाम बचपन में ट्रेन से अखबार उतारने का काम करते थे। अखबार उतारने का काम कलाम का पहला रोजगार नहीं था,इससे पहले वो इमली के बीज जमा करने का काम करते थे। उस समय इमली के बीज की काफी डिमांड थी।

2. नारियल तोड़ने में बनाना चाहते थे पेशा

अपनी बायोग्राफी ‘माय लाइफ’ में अब्दुल कलाम ने बताया कि वो पायलट बनने से पहले नारियल तोड़ने को अपना पेशा बनाना चाहते थे।

3.पोखरण परीक्षण में निभाई थी अहम भूमिका

1992 से लेकर 1999 तक कलाम प्रधानमंत्री और DRDO के सेक्रेटरी के चीफ साइंटिफिक एडवाइजर रहे थे। पोखरण परमाणु परिक्षण में डॉ. कलाम ने अहम भूमिका निभाई थी।

4. रोज सुबह की नमाज़ पढ़ने थे

राष्ट्रपति होने के बावजूद कलाम अपने लिए कुछ समय निकाल ही लेते थें।डॉक्टर कलाम हर दिन सुबह फ़ज्र की नमाज़ पढ़ा करते थें। इसके अलावा वो कुरान और गीता पढ़ते थें। उनको रुद्र वीणा बजाने का बहुत शौक था।

5. अग्नि और पृथ्वी मिसाइल्स के प्रमुख

वह अग्नि और पृथ्वी मिसाइल्स के विकास और संचालन के प्रमुख थे, यही वजह है कि उन्हें ‘मिसाइल मैन’ कहा जाता है।

6. कभी नहीं लिया किसी से उपहार

कलाम ने आज तक कभी भी किसी से उपहार नहीं लिया था,ये सीख उन्हें उनके पिता ने दी थी।

7. पहले ग़ैर राजनीतिक राष्ट्रपति

कलाम शायद भारत के पहले ग़ैर राजनीतिक राष्ट्रपति थे। उनके समकक्ष अगर किसी को रखा जा सकता है तो वो थे डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन। लेकिन राधाकृष्णन भी पूरी तरह से ग़ैर राजनीतिक नहीं थे। राधाकृष्ण सोवियत संघ में भारत के राजदूत रह चुके थे।

8. 48 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से मानद डॉक्टरेट

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि उन्हें भारत और विदेश के 48 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से मानद डॉक्टरेट प्राप्त थे।

9. पहले कुँवारे राष्ट्रपति

उन्होंने 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा की।वह भारत के पहले राष्ट्रपति थे जो कुंवारे और शाकाहारी थे।

10. इफ़्तार पार्टी की रकम कर दी अनाथालय में दान

एक दिन उनको राष्ट्रपति भवन के अफसर ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति भवन में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया जाना है। राष्ट्रपति कलाम ने अपने सचिव पीके नायर से पूंछा बताइए कि हम इफ़्तार भोज पर कितना खर्च करते हैं.’ राष्ट्रपति भवन के आतिथ्य विभाग को फ़ोन लगाया गया। उन्होंने बताया कि इफ़्तार भोज में मोटे तौर पर ढाई लाख रुपए का ख़र्च आता है. कलाम ने कहा, ‘हम ये पैसा अनाथालय को क्यों नहीं दे सकते ? आप अनाथालयों को चुनिए और ये सुनिश्चित करिए कि ये पैसा बरबाद न जाए.’ राष्ट्रपति भवन की ओर से इफ़्तार के लिए निर्धारित राशि से आटे, दाल, कंबलों और स्वेटरों का इंतेज़ाम किया गया और उसे 28 अनाथालयों के बच्चों में बाँटा गया।इसके अलावा उन्होंने 1 लाख रुपये का खुद से दिया।

11. जब जूता बनाने वाला और ढाबा मालिक बने मेहमान

2002 में राष्ट्रपति बनने के बाद डॉक्टर पहली बार केरल गए थे। उस वक्त केरल राजभवन में राष्ट्रपति के मेहमान के तौर पर दो लोगों को न्योता भेजा गया। वो दो मेहमान कोई नेता या अधिकारी नहीं बल्कि सड़क पर बैठने वाला एक मोची और एक छोटे से ढ़ाबे का मालिक था। एक वैज्ञानिक के तौर पर कलाम ने त्रिवेंद्रम में काफी समय बिताया था।इस मोची ने कई बार उनके जूते गांठे थे और उस छोटे से होटल में कलाम ने कई बार खाना खाया था

12. ट्रस्ट को दान कर देते थे अपनी पूरी तन्ख्वाह

डॉ कलाम ने कभी अपने या परिवार के लिए कुछ बचाकर नहीं रखा.। राष्ट्रपति पद पर रहते ही उन्होंने अपनी सारी जमापूंजी और मिलने वाली तनख्वाह एक ट्रस्ट के नाम कर दी। उनका मानना था कि वो देश का राष्ट्रपति बन गए हैं। और वो जबतक जिंदा रहेंगे उनको सारी सरकारी सुविधाएं मिलती रहेंगी। तो फिर मुझे तन्ख्वाह और जमापूंजी बचाने की क्या जरूरत है।

13. केवल 2 बार ली थी छुट्टी

आम तौर अन्य नेता छुट्टी पर घूमने जाने के लिए बेकरार रहते हैं लेकिन राष्ट्रपति कलाम वो शख्स थे जिन्होंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में सिर्फ 2 छुट्टियां ली. एक बार तब जब उनके पिता की मौत हुई थी और दूसरी बार तब जब उनके माता जी का देहांत हुआ था.

14. अपने खर्चे पर राष्ट्रपति भवन में रुकवाया था परिवार 

कलाम के राष्ट्रपति रहने के दौरान कुछ रिश्तेदार उनसे मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे, उनका कुछ दिनों तक ठहरने का कार्यक्रम था। वे जितने दिन रुके, उनके आने-जाने और रहने-खाने का सारा खर्च कलाम ने अपनी जेब से दिया।अधिकारियों को साफ निर्देश था कि इन मेहमानों के लिए राष्ट्रपति भवन की कारें इस्तेमाल नहीं की जाएंगी। साथ ही यह भी कहा गया कि  रिश्तेदारों के राष्ट्रपति भवन में रहने और खाने-पीने के खर्च का ब्यौरा अलग से रखा जाएगा और इसका भुगतान राष्ट्रपति के नहीं बल्कि कलाम के निजी खाते से होगा। एक हफ्ते में इन रिश्तेदारों पर हुआ तीन लाख से ज्यादा का कुल खर्च देश के राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने अपनी जेब से भरा था।

15. मंच पर बड़ी कुर्सी पर बैठने से मना किया

साल 2013 में IIT वाराणसी में दीक्षांत समारोह में कलाम बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। वहाँ पर डॉक्टर कलाम ने कुर्सी पर बैठने से मना कर दिया.. क्योंकि वो वहां मौजूद बाकी कुर्सियों से बड़ी थी। कलाम बैठने के लिए तभी राजी हुए जब आयोजकों ने बड़ी कुर्सी हटाकर बाकी कुर्सियों के बराबर की कुर्सी मंगवाई।

16. पक्षियों के प्रति काफी संवेदनशील थे कलाम

डॉ कलाम पक्षियों के प्रति काफी संवेदनशील थे। एक बार DRDO की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए  चारदीवारी पर कांच के टुकड़े लगाने की बात उठी, लेकिन कलाम ने इसकी सहमति नहीं दी। उनका कहना था कि चारदीवारी पर कांच के टुकड़े लगे..तो उस पर पक्षी नहीं बैठ पाएंगे और उनके घायल होने की आशंका भी बढ़ जाएगी। इसके अलावा एक बार मुग़ल गार्डेन में टहलने के दौरान उन्होंने देखा कि एक मोर अपना मुंह नहीं खोल पा रहा है. उन्होंने तुरंत राष्ट्रपति भवन के वेटरनरी डाक्टर सुधीर कुमार को बुला कर मोर की स्वास्थ्य जाँच करने के लिए कहा। जाँच करने पर पता चला कि मोर के मुँह में ट्यूमर है। जिसके बाद कलाम ने उस मोर के ट्यूमर की सर्जरी करवाई।

17. VIP तामझाम छोड़ रात में ही छात्रों के बीच पहुंचे

एक बार डॉ कलाम को एक कॉलेज के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शरीक होना था. उस वक्त तक वो राष्ट्रपति तो नहीं बने थे लेकिन डीआरडीओ में एक बड़े पद पर थे और सरकार के सलाहकार भी थे. कार्यक्रम से एक दिन पहले रात में ही कलाम को कार्यक्रम की तैयारी देखने का इच्छा हुई. वो बिना सुरक्षा लिए ही जीप में सवार होकर कार्यक्रम की जगह पहुंच गए और वहां मौजूद छात्रों से बात की. VIP तामझाम से उलट डॉ कलाम के इस अंदाज ने छात्रों का दिल जीत लिया.

18. बिजली गुल हुई तो छात्रों के बीच जाकर भाषण दिया

साल 2002 की बात है. डॉ कलाम का नाम अगले राष्ट्रपति के रूप में तय हो चुका था. उसी दौरान एक स्कूल ने उनसे छात्रों को संबोधित करने की गुजारिश की. बिना सुरक्षा तामझाम के डॉ कलाम उस कार्यक्रम में शरीक हुए. 400 छात्रों के सामने वो भाषण देने के लिए खड़े हुए ही थे कि बिजली गुल हो गई. आयोजक जबतक कुछ सोचते…डॉ कलाम छात्रों के बीच पहुंच गए और बिना माइक के अपनी बात रखी और छात्रों के सवालों का जवाब दिया.

19. प्रशंसक को कभी नाराज नहीं करते थे

डॉ कलाम में एक बड़ी खूबी ये थी कि वो अपने किसी प्रशंसक को नाराज नहीं करते थे। एक बार डॉ कलाम IIM अहमदाबाद के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनकर गए। कार्यक्रम से पहले छात्रों ने डॉ कलाम के साथ लंच किया और छात्रों की गुजारिश पर उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने लगे। कार्यक्रम में देरी होता देख आयोजकों ने छात्रों को तस्वीरें लेने से मना किया। इस पर कलाम ने छात्रों से कहा कि ‘कार्यक्रम के बाद मैं तबतक यहां से नहीं जाऊंगा जबतक आप सभी के साथ मेरी तस्वीर न हो जाए।

20.सभी प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार से सम्मानित 

कलाम को देश के सभी प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें पद्म भूषण (1981), पद्म विभूषण (1990) और भारत में सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न (1997) से सम्मानित किया गया।

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