सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐसी कंपनियों के खिलाफ जुलाई के आखिर तक कोई कार्रवाई न की जाए जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान कामगारों को वेतन नहीं दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकारें पहले कंपनियों और कामगारों के बीच इस मसले पर चर्चा कर एक सहमति बनाने में मदद करें और फिर संबंधित श्रमायुक्तों को अपनी रिपोर्ट दें. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को उस अधिसूचना पर जवाब दाखिल करने के लिए चार और हफ्ते का समय दे दिया है जो उसने 29 मार्च को जारी की थी. इसमें कंपनियों के लिए लॉकडाउन के दौरान कामगारों को वेतन देना अनिवार्य कर दिया गया था.

इससे पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने फैसले को सही ठहराया था. उसका कहना था कि जो कंपनियां यह कह रही हैं कि वे वेतन देने में सक्षम नहीं हैं उनकी ऑडिटेड बैलेंस शीट और खातों की जानकारी अदालत में पेश करने को कहा जाए. सरकार के मुताबिक यह आदेश इस मुश्किल वक्त के दौरान खासकर ठेके पर और बिना अनुबंध के काम कर रहे कामगारों के संकट कम करने के लिए जरूरी था.

15 मई को इसी मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मुद्दे पर फैसला देने से पहले कुछ बड़े सवालों का जवाब मिलना जरूरी है. अदालत के मुताबिक हो सकता है कि कुछ छोटी कंपनियों की कमाई बंद हो गई हो और इसलिए वे कामगारों को वेतन देने में सक्षम न हों. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक ऐसे में ये कंपनियां सरकार की मदद के बिना उसके आदेश का पालन नहीं कर सकतीं.

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