सूरज की गर्मी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. आमतौर पर भारत में मार्च से गर्मी का असर देखने को मिल जाता है. लेकिन मई, जून, जुलाई में भीषण गर्मी के साथ-साथ हीटवेव का असर और भी देखने को मिलता है. ऐसे में सबसे बेहतर है, कि हीटवेव से बचने के लिए अपने घर के अंदर ही रहें.

बहुत से देशों में इन महीनों में भी ठंडक रहती है लेकिन एक ऐसी बात सामने आई है.  जिससे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हो गए  हैं. दुनियां का सबसे ठंडा इलाका भी सूरज की चपेट में आ गया है.
हम  बात कर रहे हैं, आर्कटिक क्षेत्र की जहां बुध्दिजीवियों ने बताया है, कि इस साल ठंडी लहरे नहीं, बल्कि चटक धूप और गर्म लहरों का सामने करना पड़ेगा.

अधिक गर्म हवा यानी हीटवेव के चलने से साइबेरिया से लेकर ग्रीनलैंड तक पारा लगातार बढ़ रहा है. शोधकर्ताओं ने बताया है, कि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ.  इसका सीधा असर रूस में देखने को मिलेगा.

अमेरिका के NOAA (The National Oceanic and Atmospheric Administration)  ने साफ बताया है, कि तापमान में 5 फीसदी इजाफा हुआ है. जिसको नक्शे में गहरे लाल रंग से देखा जा सकता है.

वैज्ञानिकों ने यहां तक कहा है कि 1981 से 2010 तक ऐसा गर्म मौसम को कभी अनुभव नहीं किया गया. रूस के मौसम विभाग भी जल्द मैप अपडेट करेगा

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