यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग एंड क्राइम (UNODC) ने भारत में अपने एजुकेशऩ फॉर जस्टिस इनीशिएटिव प्रोग्राम के तहत ‘लॉकडाउन लरनर्स’ सीरीज शुरू की है.

UNODC दक्षिण एशिया के रिजनल रेप्रेंजेटेटिव सर्गेई कपिनोस के बताया,

”UNODC का मानना है कि इस संकट को एजुकेशन के बगैर दूर नहीं किया जा सका. ये समझ यूनाइटेड नेशंस के किसी को पीछने ना छूटने देने के सिद्दांतों के अनुरूप है. इसलिए इसमें हर रोज सामने आ रहे कोविड-19 के प्रभावों, खासतौर पर बच्चों और युवाओं से जुड़ें मानवाधिकार, स्वास्थ्य, शांति, सुरक्षा और कानून से जुड़े मुद्दों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा.”

इस सीरीज का मकसद है कि महामारी के इस दौर में गरीब तबके की दिक्कतों के लिए समझ विकसित की जा सके. साथ ही उन्हें साइबर क्राइम, जेंडर बेस्ड वायलेंस, भेदभाव और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के प्रति जागरुक बनाया जा सके.

 

कोविड-19 का शिक्षा पर प्रभाव

यूनाइटेड नेशंस जनरल सेक्रेटरी एंतोनियो गुटेरेश ने कोविड-19 पर अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि करीब 165 देशों में स्कूल और यूनिवर्सिटी बंद हैं जिसके कारण दुनिा के 87 फीसदी स्कूलों यूनिवर्सिटीज के 1 अरब 52 करोड़ से अधिक बच्चे और युवा छात्र प्रभावित हैं. वो फिलहाल स्कूल या यूनिवर्सिटी नहीं जा पा रहे है . इसके अलावा करीब 6 करोड़ 2 लाख टीचर अपनी कक्षाओं से दूर हैं. दुनिया ने पहले कभी एक साथ इनते ज्यादा बच्चों की पढ़ाई में बाधा को नहीं देखा,

इस तरह की बंदी होने और स्कूल बंद होने से बच्चों की शिक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. साथ ही लड़कों और लड़कियों के लिए शोषण और गलत इस्तेमाल का जोखिम भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है.

इसी वजह से फिलहाल भेदभाव, लिंग आधारित हिंसा, फेक जानकारी और साइबर क्राइम जैसे जो मुद्दे उभर रहे हैं, उन पर बच्चों को जागरूक करने की जरूरत है.

 

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