प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण भारत की आजीविका और अवसरों को बढावा देने के लिए शनिवार 20 जून को गरीब कल्याण रोजगार योजना लॉन्च करेंगे प्रधानमंत्री कार्यालय ने जानकारी देते हुए बताया कि इसे 6 राज्यों में 116 जिलों, 125 दिनों का यह अभियान प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए मिशन मोड में काम करने के लिए है.

कोरोना संकट के बीच कई प्रवासी मजदूर अपने घर लौटे हैं. भारत के इतिहास में पहली बार इस तरह की विपदा देखी गई है. अगर आंकड़े निकाले जाएं तक करीब 1 करोड़ मजदूर लॉकडाउन में अपने घर लौटे हैं. मजदूरों के लिए एक संकट की स्थिति आ जन्मी है. जिसका निवारण करना जरूरी है. मजदूर देश का अहम हिस्सा हैं. जिनके लिए आज रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई है.

इस समय रोजगार की समस्या आजीविका और अवसरों को  मद्देनजर रखते हुए मोदी सरकार ने गरीब कल्याण रोजगार योजना लॉन्च की है.

इस स्कीम के अनुसार उत्तर प्रदेश के 31 जिलों को शामिल किया गया है. इसके साथ ही चुनावी राज्य बिहार में 32 जिलों, मध्यप्रदेश के 24 राजस्थान के 22 ओडिशा के 4 और झारखंड के 3 जिलों में यह योजना चलाई जाएगी.

इस योजना में रिज़र्व माइग्रेशन ने तहत गांव लौट लोगों के लिए खास प्रावधान किए गए हैं. इन योजना में इस विषय का ध्यान रखा गया है कि कामगारों को रोजी रोटी की कोई दिक्कत न हो.

अभियान के 125 दिनों में सरकार की करीब 25 योजनाओं को एकसाथ लाया जाएगा. इन 25 योजनाओं में जिसको भी काम की जरूरत है उसे काम दिया जाएगा. कामगारों के कौशल के मुताबिक उन्हें काम दिया जाएगा. इसलिए अलग-अलग विभाग की 25 योजनाओं को इस अभियान में शामिल किया गया है.

इस योजना पर 50 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. यह केंद्र सरकार की ओर आए घोषित 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का हिस्सा है.

इस योजना के तहत 60 लाख कामगारों पर फोकस किया जाएगा.

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