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दोनों ही सदनों में किसान बिल पास होने पर विरोध प्रदर्शन जारी रहने के बाद भी मोदी कैबिनेट ने किसानों को तोहफा दिया है। मोदी सरकार ने कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिश को मनाते हुए रबी की फसलों में न्यूनतम समर्थन मुख्य MSP में वृद्धि करने का फैसला किया गया है। 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य में एपीएमसी कानून के तहत संचालित मंडियों के अलावा एक वैकल्पिक चैनल मुहैया कराने का नया कानून बनाया है। नए कानून में गेंहूं, चावल या मोटा अनाज, दालें तिलहन खाद्य, तेल, सब्जी, फल, मेवा मसाले, कुक्कुट, सुअर, मछली, बकरी और डेरी उत्पाद सहित ऐसे खाद्य पदार्थ जिनका नैसर्गिक या प्रसंस्कृत रूप से मानव उपभोग करता है। उनको कृषक उत्पादक कहा जाता है। 

 

बढ़ सकती है गेहूं पर MSP 

जानकारी के मुताबिक सरकार गेहूं की MSP में 85 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर सकती है। गेहूं की MSP 2019-20 में 1840 रुपए प्रति क्विंटल थी। जिसे बढ़ाकर अब 1925 रुपए कर दी गई है। 

 

क्यों जरूरी है समर्थन मूल्य? 

इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि बाजार में फसल की कीमत गिरने पर भी किसानों को सरकार तय किया गया मूल्य देगी। इस तरह से सरकार नुकसान कम करने की कोशिश में रहती है। 

 

क्या है MSP 

  • MSP एक न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी कि गारंटेड मूल्य है जो किसानों को उनकी फसलों पर मिलता है। भले ही बाजार में उन फसलों की कीमत कम क्यों न हो। इसका मुख्य लक्ष्य यह है कि बाजार के उतार चढ़ाव का असर किसानों और नहीं पड़ता। 

 

  • सरकार हर सीजन से पहले सीएसीपी यानी कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज की सिफारिश पर MSP तय की जाती है। किसी भी फसल की पैदावार ज्यादा होती है तो उसकी बाजार में कीमतें कम हो जाती हैं। तब MSP उनके लिए फिक्स एश्योर्ड प्राइज का काम करती है। एक तरह से यह बाजार में कीमतें गिरने पर किसानों को नुकसान से बचाने के लिए बीमा पॉलिसी का काम करती है। 

 

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