अगर आप इंफेक्शन से परेशान हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। अच्छे अस्पतालोंं मेंं इंफेक्शन की जांच मात्र दो घंटे मेंं हो जाती है।
SRMS
एसआरमएस मेडिकल कॉलेज मेंं यूपी-यूके माइक्रोकॉन के पहले दिन अलग-अलग शहरों में स्थित स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिभागियों ने एसआरएमएस इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज में मौजूद विश्व स्तरीय मशीनों की जानकारी ली। वर्कशाप में शामिल हुए और विशेषज्ञ इंजीनियरों के साथ मशीनों पर काम कर सभी तरह के इंफेक्शन की जांच की प्रक्रिया देखी। समझा कि किस तरह स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी, इंफ्यूंजला की जांच की जाती है।

दिमागी बुखार, चेस्ट इंफेक्शन की वजहों का पता दो घंटे में लगाया जा सकता है। कैसे रेसिस्टेंट टीबी के मरीजों की पहचान कर समाज में इसे फैलने से रोका जा सकता है। एसआरएमएस इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस के माइक्रोलॉजी विभाग के एचओडी डा.राहुल कुमार गोयल ने कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने क्लीनिकल माइक्रोलॉजी के बारे में हो रहे बदलावों की जानकारी भी दी और कोरोना जैसे नए वायरस का डीएनए पता चलते ही इसके उपचार में सक्षम होने की उम्मीद भी जताई।

एफएच मेडिकल कालेज आगरा, आईएमएस बीएचयू, आरएमसीएच बरेली, राजश्री मेडिकल कालेज, हिंद मेडिकल कालेज लखनऊ, हिंद इंस्टीट्यूट आफ मिडकल सीतापुर, इंटीग्रल विवि लखनऊ, एएमयू अलीगढ़, वीएमएमसी नई दिल्ली, केजीएमयू लखनऊ, एनआईएमएस जयपुर, जीएमसी हल्द्वानी, साई हास्पिटल मुरादाबाद, हैरिटेज आईएमएस वाराणसी, जीएमसी बदायूं, संजय गांधी आईएमएस लखनऊ से आए प्रतिभागी वर्कशाप में शामिल हुए।

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