वैसे तो कांग्रेस किसी न किसी बात को लेकर सरकार पर निशाना साधती रहती है लेकिन आज कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार को नसीहत देते हुए सरकार से एक बार फिर मनरेगा यानी कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून MNREGA 2005 की एहमियत बताते हुए कहा, कि इसे राजनीतिक मुद्दा न बनाये. इसके जरिए आप जरुरतमंद लोगों की मदद करें.

एक तरफ सोनिया गांधी ने मनरेगा को क्रांतिकारी परिवर्तन का उदहारण बताया है वहीं प्रधानमंत्री ने इसे विफलता का उदहारण बताया है.

कांग्रेस अध्य्क्ष सोनिया गांधी का कहना है, कि इस कानून ने गरीब से गरीब के हाथ में काम दिया है और भूख मिटाने का काम किया है. सोनिया गांधी इसे इसलिए एहमियत दे रही हैं क्योंकि इससे पैसा सीधे लोगों के हाथ में जाता है. इससे कई जरुरतमंदो की मदद हुई है.

इतना ही नहीं, सोनिया ने मनरेगा को राजनीतिक मुद्दा न बनाने की मांग करी है. एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार सोनिया ने कहा कि “यह बीजेपी बनाम कांग्रेस का मुद्दा नहीं है. जरुरतमंदो की मदद के लिए मनरेगा का इस्तेमाल करें.

इस लेख में आगे लिखा, कि यह क्रांतिकारी है क्योंकि इससे गरीबों को सत्ता हस्तांतरित की और उन्हें भूख के आभाव से बचने में सक्षम बनाया. यह उपयोगी है, क्योंकि इससे  संकट के समय में जनता को हाथ में पैसा मिलता है.

साथ ही कहा, कि पिछले साल मनरेगा को खत्म करने की पूरी कोशिश की गई है, लेकिन अब दबाव के कारण इसे पूरी तरह बंद नहीं कर पाए हैं

राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा व बाकी कांग्रेस पार्टी के सदस्यों के साथ मोदी सरकार से फिर मनरेगा की मांग की है, जिससे इस लॉकडाउन के समय लोगों की मदद हो सके.

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