World Women’s Day 2020:ऐसी बेटियां जिन्‍होंने जल, थल और वायु सेना में शामिल होकर देश का मान बढ़ाया। कुछ बेटियों ने देश के लिए शहादत भी दी। देश उनका त्‍याग और बलिदान कभी नहीं भूल सकता। देश की ऐसी ही वीर बेटियों के बारे में जानिए-
women's day 2020
किरण शेखावत: राजस्थान की बेटी व हरियाणा की बहू लेफ्टिनेंट किरण शेखावत देश में ऑन ड्यूटी शहीद होने वाली पहली महिला अधिकारी थीं। 24 मार्च 2015 की रात को गोवा में डॉर्नियर निगरानी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें लेफ्टिनेंट किरण शेखावत शहीद हो गई थीं। 1 मई 1988 को गांव सेफरागुवार विजेन्द्र सिंह शेखावत के घर किरण का जन्म हुआ। लेफ्टिनेंट किरण शेखावत अपनी शहादत से पांच साल पहले भारतीय नौसेना में भर्ती हुई थीं।

भारतीय वायुसेना की पहली महिला एयर मार्शल
पद्मावती बंधोपाध्याय को भारतीय वायुसेना की पहली महिला एयर मार्शल होने का गौरव प्राप्त है। वे चिकित्सा सेवा की महानिदेशक रहीं। पद्मावती ने सन् 1968 में भारतीय वायुसेना ज्वाइन की थी। 34 साल बाद अपनी नि:स्वार्थ सेवा भाव और देशप्रेम के चलते सन् 2002 में एयर वाइस मार्शल के पद पर पहुंचने वाली भारतीय वायु सेना की पहली महिला अधिकारी बनीं।

दिव्या अजित कुमार: दिव्या अजित कुमार 21 साल की उम्र में सेना की स्वॉर्ड ऑफ ऑनर हासिल करने वाली देश की पहली महिला कैडेट बन गईं थी। दिव्या ने पढ़ाई में भी तीन स्वर्ण पदक जीते हैं। कप्तान दिव्या अजित कुमार को सितंबर 2010 में सेना के वायु रक्षा कोर में नियुक्त किया गया था। पहली बार अखिल भारतीय महिला कप्तान दिव्या  अजित कुमार ने गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2016) की परेड का नेतृत्व किया। उन्होंने 154 महिला अधिकारियों और कैडेट के एक दल का नेतृत्व किया था, उस वक्त गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा थे।

नौसेना की पहली महिला लेफ्टिनेंट जनरल
पुनीता अरोड़ा भारतीय नौसेना की पहली महिला लेफ्टिनेंट जनरल थीं। पुनीता का जन्म 13 अक्तूबर 1932 को पाकिस्तान के लाहौर प्रांत में हुआ था। 2004 में पुनीता अरोड़ा, भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंचने वाली प्रथम भारतीय महिला बनीं। पुनीता ने अपनी ड्यूटी का काफी वक्त पंजाब में गुजारा। 2002 में विशिष्ट सेवा पदक मिला। उन्हें 36 साल की सेवा में कुल 15 पदक मिले।

तीन महिलाएं जो बनीं फाइटर प्‍लेन की पायलट: 18 जून 2016, यह वही दिन था जब इन तीन जांबाजों को देश के नभ को सुरक्षित रखने का जिम्मा सौंप दिया गया था। बिहार के बेगूसराय की भावना कंठ,  मध्यप्रदेश के रीवा की अवनी चतुर्वेदी और वडोदरा की मोहना सिंह पहली बार वायुसेना में बतौर फाइटर प्लेन पायलट बनीं।

गुंजन सक्‍सेना: गुंजन सक्सेना को ‘कारगिल गर्ल’ के रूप में भी जाना जाता है। कारगिल युद्ध में जहां भारतीय सेना ने दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे वहीं हमारी महिला पायलट भी इसमें पीछे नहीं थीं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना एक ऐसी महिला पायलट थीं जिन्होंने कारगिल युद्ध के की लड़ाई में पाकिस्तान से लोहा लिया था। इसके लिए गुंजन को उनके साहस के लिए शौर्य पुरस्कार दिया गया था। गुंजन ने कारगिल वार के दौरान भारतीय सेना के घायल जवानों को सुरक्षित निकालकर लाना उनकी सबसे बड़ी कामयाबी थी।

शांति तिग्‍गा: शांति तिग्गा ने 13 लाख रक्षा बलों में पहली महिला जवान बनने का अनोखा गौरव हासिल किया है। भर्ती प्रशिक्षण शिविर के दौरान तिग्गा ने बंदूक को हैंडल करने के अपने कौशल से अपने प्रशिक्षकों को काफी प्रभावित किया और निशानेबाजों में सर्वोच्च स्थान हासिल किया था। शारीरिक परीक्षण, ड्रिल और गोलीबारी समेत आरटीसी में समूचे प्रदर्शन में उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु चुना गया था जिसके आधार पर उन्हें पहली महिला जवान बनने का मौका मिला।

मेजर खुशबू कंवर: देश की राजधानी दिल्ली में राजपथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस के मौके पर असम रायफल्स के महिला सैनिक दस्ते की परेड का नेतृत्व खुशबू तंवर ने किया। असम राइफल्स की महिला टुकड़ी पहली बार गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल हुई थी।

भावना कस्‍तूरी: 15 जनवरी 2019 को आर्मी डे के मौके पर आर्मी परेड का नेतृत्व महिला अफसर लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी ने किया। लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी ने आर्मी सर्विस कोर के 144 जवानों को लीड किया।

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