सीमा सड़क संगठन ने धारचूला से चीन बॉर्डर पर लिपुलेख पास तक सड़क बनाने का काम पूरा कर लिया है

पवित्र कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा अब और भी आसान होगी. यह सीमा सड़क संगठन के अथक प्रयासों के कारण संभव हुआ है, जिसने उत्तराखंड में एक नये मार्ग का निर्माण किया है जो तीर्थयात्रा में लगने वाले समय को बहुत कम कर देगा. धारचूला से चीन सीमा पर बसे लिपुलेख तक की 80 किलोमीटर की सड़क जहां ऊंचाई 6,000 फीट से 17,060 फीट तक जाती है पूरी तरह से वाहन चलाने योग्य है.

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ट्विटर पर कहा, ये पहली बार है कि “सीमावर्ती गाँव सड़कों से जुड़े हैं और पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्री अब 90 किमी. ट्रेक से बच सकते हैं और वाहनों से चीन की सीमा तक जा सकते हैं.” सड़क का उद्घाटन शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा किया गया, उन्होंने  वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा पिथौरागढ़ से वाहनों के पहले काफिले को रवाना किया.

बर्फ गिरने, और बेहद कम तापमान के कारण सड़क के निर्माण में बहुत बाधायें उत्पन्न हुई और काम को पांच महीने तक सीमित रखना पड़ा. इसके अलावा, पिछले वर्षों में बाढ़ और बादल फटने की घटनाएं हुईं, जिससे बहुत नुकसान हुआ. शुरू के 20 किलोमीटर में, पहाड़ों में कठोर चट्टानें हैं जिससे बीआरओ के कई लोगों की जानें गईं और 25 उपकरण भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए. सभी बाधाओं के चलते, पिछले दो वर्षों में बीआरओ ने नये उपकरणों को शामिल करके काम को 20 गुना तेज़ी से किया.

वर्तमान में, कैलाश मानसरोवर की यात्रा में सिक्किम या नेपाल मार्गों से लगभग दो से तीन सप्ताह लगते हैं. लिपुलेख मार्ग में ऊंचाई वाले इलाकों से होकर 90 किलोमीटर का रास्ता था जिससे बुजुर्गों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. अब, सीमा तक की पूरी यात्रा वाहनों द्वारा की जा सकेगी.

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