नाथ संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों का शहर

अलखनाथ मंदिर – बरेली के सबसे प्राचीन मंदिरों में है अलखनाथ मंदिर। मान्यता है कि मुगलकाल में हिन्दुत्व की रक्षा के लिए यहां कई मुनियों ने तप किया था। आज भी इस मंदिर में मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है का बोर्ड लगा है।

धोपेश्वरनाथ मंदिर – कैंट इलाके का यह मंदिर अपने कुंड की प्रतिष्ठा के लिए प्रसिद्ध है। कहते हैं कि यहां विशेष पर्व पर पूजा-पाठ करने से भगवान धोपेश्वरनाथ सभी मानोकामना पूरी करते हैं।

मढ़ीनाथ मंदिर – सुभाषनगर इलाके का मढ़ीनाथ मंदिर भी ज्योतिर्लिंग स्वरूपों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां कुआं खोदते समय शिवलिंग प्रकट हुआ था।

वनखंडीनाथ मंदिर – पौराणिक मान्यता है कि महारानी द्रौपदी ने गुरु के आदेश पर इस शिवलिंग की स्थापना की थी। मुगलकाल में इस शिवलिंग को हाथी से खिंचवाया गया था तो यह खंडित हो गया था।

त्रिवटीनाथ मंदिर – इस मंदिर का प्रादुर्भाव सन 1470 में माना  जाता है। कहते हैं कि एक चरवाहे को यहां शिवलिंग मिला था और तभी से त्रिवट की पूजा की जाती है।

पशुपतिनाथ मंदिर – पीलीभीत बाईपास स्थित यह मंदिर काठमांडो स्थित पशुपतिनाथ की तर्ज पर बनाया गया है। सावन में यहां भक्तों की खासी भीड़ जुटती है।

तपेश्वरनाथ मंदिर – नगर के दक्षिण दिशा में इस भूमि पर कई ऋषियों ने तप किया था और इसी वजह से इसका नाम भी तपेश्वरनाथ मंदिर पड़ा।

चौरासी घंटा मंदिर – करगैना स्थित यह मंदिर नवरात्र में भक्तों की आस्था का केंद्र होता है। कहते है, जब पहले दिन मंदिर में पूजा हुई तो 84 घंटे चढ़ाए गए थे। तभी से इसे चौरासी घंटा मंदिर कहते हैं।

नौदेवी मंदिर – साहूकारा स्थित नौदेवी मंदिर में मां के नौ स्वरूप हैं। नवरात्र में यहां विशेष आराधना होती है और कहते हैं कि भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है।

गुलड़िया गौरी शंकर – आंवला स्थित इस मंदिर में करीब 5 फीट का शिवलिंग लोगों की आस्था का विशेष केंद्र है। यहां हर सोमवार को भक्त मनोकामना पूरी करने के लिए आराधना करते हैं।

दरगाह आला हजरत: बरलेवी मसलक के सुन्नी मुसलमानों का बड़ा धार्मिक केन्द्र। सौदागरान मोहल्ले में स्थित दरगाह पर सजदा करने देश विदेश से अकीदतमंद आते हैं। हर साल इस्लामियां मैदान पर होने वाले आला हजरत के उर्स में लाखों की तादात में अकीदतमंद जुटते हैं।

खानकाहे नियाजिया: बरेली में सूफी संतों का बड़ा धार्मिक केन्द्र। यहां हर साल देश विदेश के तमाम अकीदतमंद। फिल्मी दुनिया, संगीत की दुनिया और खेलजगत के तमाम सितारे भी खानकाह के मुरीद हैं। यह खानकाह लोगों को बरसों से अमर और शांति का पैगाम दे रही है।

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