नए जमाने के virus के आगे बेअसर होने लगे antibiotics: देश के प्रतिष्ठित माइक्रोबायोलोजिस्ट ने बढ़ते एंटीबायोटिक्स के चलन और उसके बेअसर होने पर चिंता जताई। इसके लिए साझा रणनीति बनाने और एंटीबायोटिक्स के प्रयोग को कम करने पर भी सहमति जताई। सभी ने इसके लिए सरकार से भी अपनी पालिसी बदलने की अपील की। जिससे एंटीबायोटिक्स का प्रयोग कम किया जाए और वह मरीज पर बेअसर न हो।
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SRMS MEDICAL COLLEGE BAREILLY में यूपी-यूके माइक्रोकान 2020 के दूसरे दिन शुक्रवार को देश भर के आए विशेषज्ञ डाक्टरों ने अपने रिसर्च को साझा किया। जो सुबह नौ बजे से आरंभ होकर शाम करीब चार बजे तक विशेषज्ञों ने बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण पर चिंता जताई। नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल के डायरेक्टर डा.बीएल शेरवाल ने बढ़ रहे संक्रमण के लिए बढ़ रहे शहरों और आबादी को भी जिम्मेदार ठहराया। साथ ही बढ़ रहे एंटीबायोटिक्स पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक्स को जादू की छड़ी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

दवाइयों में 30 फीसद एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल बढ़ा है। इसकी वजह आर्थिक संपन्नता, हेल्थ कवर और इनकम का बढ़ना भी है। उन्होंने कहा कि इसके ज्यादा इस्तेमाल से शरीर पर बेअसर हो जाता है। हालांकि यह जानवरों और खेती के जरिये भी मानव में पहुंच रहा है। उन्होंने इसके लिए सरकार से नीतियों में बदलाव की भी अपील की। बीएचयू के डा. गोपाल नाथ ने वायरस और बैक्टीरिया को भूत की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि पुराने जमाने में इससे होने वाली बीमारियां भूत और प्रेत जनित बताई जाती थीं। हमने माइक्रोलाजी को तंत्र विद्या बना कर इस पर निजात पाना आसान किया है। डा.गोपाल ने वैक्टीरियोफेज को इलाज में मददगार बनाने पर अपनी रिसर्च पर जोर दिया।

कोरोना वायरस की उत्‍तर प्रदेश प्रभारी व केजीएमयू आईएमएस की डाक्टर अमिता जैन ने एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम पर अपनी रिसर्च को साझा किया। जबकि आरएमआई आईएमए लखनऊ की डा.ज्योत्स्ना अग्रवाल ने सही जांच और एंटीबायोटिक्स के सही इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सही जांच के 62 वैध तरीके होने के बाद भी बिना जांच के एंटीबायोटिक्स देना खतरनाक है। आरएमएल आईएमसी लखनऊ की ही डा.विनीता मित्तल ने लैप्टोस्पाइरोसिस पर अपनी रिसर्च को साझा किया। उन्होंने कहा कि चूहे और कुत्तों के जरिये यह बीमारी मनुष्यों में फैलती है। इससे बचाव जरूरी है। डाक्टरों ने दो दसक से कोई नई एंटीबायोटिक्स की खोज न होने पर भी चिंता जताई।

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