केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्‍ली चुनाव में भाजपा नेताओं के बोली मारो जैसे बयानों से पार्टी को नुकसान हुआ। उन्‍होंने कहा कि भाजपा अपनी हार या जीत के लिए चुनाव नहीं लड़ती।
AMIT SHAH
एक अंग्रेजी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में शाह ने कहा कि गोली मारो और भारत-पाकिस्तान मैच जैसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए थे। हमारी पार्टी ऐसे बयानों से खुद को दूर रखती है। उन्होंने स्वीकार किया कि दिल्ली चुनाव में पार्टी के कुछ नेताओं के बयानों के चलते भाजपा को नुकसान हुआ। साथ ही कहा कि दिल्ली चुनाव को लेकर उनका आकलन गलत साबित हुआ लेकिन उन्होंने इस चुनाव परिणाम को नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर जनादेश मानने से इनकार कर दिया।

जो भी व्यक्ति नागरिकता कानून पर उनसे चर्चा करना चाहता है, वह उनके कार्यालय से वक्त ले सकता है। हम उन्हें तीन दिन के अंदर वक्त देंगे। इस कानून का पुरजोर बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में सताए हुए गैर मुस्लिमों को नागरिकता देता है न कि किसी की नागरिकता छीनता है। उन्होंने कहा कि हम धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करते हैं।

एनआरसी पर अभी फैसला नहीं
उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक पूरे देश में एनआरसी लागू करने का कोई फैसला नहीं लिया है। साथ ही उन्होंने साफ किया कि जो भी लोग राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर या एनपीआर के दौरान दस्तावेज नहीं दिखाना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में एनआरसी का वादा किया था।

सभी को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक
नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे आंदोलनों पर उन्होंने कहा कि देश के हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का हक है लेकिन हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि हम गैर हिंसक प्रदर्शनों को बर्दास्त कर सकते हैं लेकिन हिंसा को नहीं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है।

सभी लोग जम्मू-कश्मीर जाने को स्वतंत्र
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर शाह ने कहा कि राजनेताओं समेत सभी लोग नवगठित केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करने के लिए स्वतंत्र हैं। लोग जब चाहे तब जा सकते हैं, किसी के भी जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को हिरासत में रखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इन तीनों पर पीएसए लगाने का फैसला स्थानीय प्रशासन ने लिया है। उमर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और इस पर न्यायपालिका को फैसला लेने दीजिए।

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