हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक
मंदिर है नागचंद्रेश्वर का, जो महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थि‍त है। यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन
नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। लेकिन इस बार वैश्विक महामारी
covid19 के चलते श्रद्धालु इस बार नागेश्वर भगवान की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन नहीं कर पाएंगे। श्रद्धालुओं
के लिए इस बार मन्दिर की वेबसाइट और सोशल मीडिया ऐप के जरिए ऑनलाइन दर्शन कराने की व्यवस्था
की गई हैं।

ऑनलाइन होंगे भक्तों को नागचन्द्रेश्वर मन्दिर के दर्शन
वैश्विक महामारी कोरोना के चलते इस बार आम श्रद्धालु नागपंचमी पर नागचंद्रेश्वर के दर्शन नहीं कर
सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर की वेबसाइट www.mahakaleshwar.nic.in और सोशल मीडिया पर
लाइव दर्शन कराए जाएंगे। इसके अलावा मध्यप्रदेश के भक्तों को प्री बुकिंग के आधार पर महाकालेश्वर
ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराए जाएंगे। 10 साल से कम और 65 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं को प्रवेश
नहीं दिया जाएगा।

दशमुखी सर्प शैया पर विराजमान हैं भगवान शिव
नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है, जिसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-
पार्वती बैठे हैं। मान्यता है कि उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है। पूरी दुनिया में यह
एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं।मंदिर
में स्थापित प्राचीन मूर्ति में शिवजी, गणेशजी और मां पार्वती के साथ दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं।
भोलेनाथ के गले और भुजाओं में सर्प लिपटे हुए हैं। मंदिर के बार बार पुनर्निर्माण के बाद नागचंद्रेश्वर की
मूर्ति को मंदिर के ऊपरी तल में दीवार में लगा दिया गया था।
क्या है पौराणिक मान्यता

सर्प राज तक्षक ने शिवशंकर को मनाने के लिए घोर तपस्या की थी। तपस्या से भोलेनाथ प्रसन्न हुए और
उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया। मान्यता है कि उसके बाद से तक्षक राजा ने
प्रभु के सान्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया। लेकिन महाकाल वन में वास करने से पूर्व उनकी यही मंशा
थी कि उनके एकांत में विघ्न ना हो अत: वर्षों से यही प्रथा है कि नागपंचमी के दिन ही वे दर्शन को उपलब्ध
होते हैं। शेष समय उनके सम्मान में परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है। पण्डित व्यास के अनुसार
नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सर्प दोष से मुक्ति
मिलती हैं। इसलिए नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट नागपंचमी के दिन ही खोले जाते हैं।

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