नन्हें मुन्न्नों को मिलेगी बस्ते के बोझ से आजादी: भारी भरकम स्कूल बैग उठाने के बाद कमर, गर्दन और पीठ के दर्द से जूझ रहे बच्चोंं को सरकार ने बड़ी राहत दी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कक्षावार बस्ते का वजन तय करने के साथ ही राज्य सरकारों से इसे सख्ती से लागू कराने को कहा है। कुछ महीने पहले आए इस आदेश को अप्रैल से शुरू हो रहे नए सत्र से लागू कराया जाना है। उम्मीद है, इस बार अप्रैल भारी बस्ते के बोझ से जूझ रहे बच्चों के लिए राहत लेकर आएगा।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को भेजे गए आदेश में इसका पालन सुनिश्चित कराने को कहा है। दो साल पहले सीबीएसई ने अपने सभी स्कूलों को आदेश जारी करके बैगलेस एजुकेशन पर जोर देने और बैग का वजन कम करने को कहा था। इसका स्कूलों पर कोई असर नहीं हुआ। स्कूल मनमानी न कर सकें इसलिए अबकी बार यह जिम्मेदारी राज्य सरकारों को दी गई है। यह आदेश करीब आठ महीने पहले आया था। मगर अब तक इस पर अमल होता नजर नहीं आ रहा। हालांकि कुछ स्कूलों ने बैगलेस एजुकेशन भी शुरू की है। मगर ज्यादातर में बच्चे अब भी भारी भरकम बस्ता लादकर स्कूलों मेंं पहुंचते हैं।

अनावश्यक किताबें हटाएं बच्चों के बैग से
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूलों में एनसीईआरटी के सिलेबस के मुताबित पढ़ाई कराने और अनावश्यक किताबें हटाने को कहा है। यानी अब स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की मनमानी किताबें नहीं लगा सकेंगे। ऐसा करने वाले स्कूलों पर आसानी से कार्रवाई हो सकेगी।

यह कहा है सरकार ने
1-कोई भी स्कूल पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को होमवर्क नहीं देगा।
2-पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को भाषा और गणित के अलावा कोई दूसरा विषय नहीं पढ़ाया जाएगा।
3-तीसरी से पांचवी ं कक्षा तक के बच्चों को भाषा, ईवीएस और गणित के अलावा कोई विषय नहीं पढ़ाया जाएगा।
4-स्कूल छात्र-छात्राओं को कोई भी अतिरिक्त किताब व कॉपी नहीं मंगाएंगे जिससे उनके बस्ते का बोझ बढ़े।
5-शिक्षा विभाग को इस आदेश का कढ़ाई से पालन करना होगा। मनमानी करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे तय किया गया है बस्ते का वजन
कक्षा एक और दो- 1.50 किलो
कक्षा तीन से पांच- 2 से 3 किलो
कक्षा छह और सात- 4 किलो
कक्षा आठ और नौ- 4.50 किलो
कक्षा 10- 05 किलो

अधिकतम वजन से भारी होगा बैग तो होगी कार्रवाई
सरकार ने बस्ते का वजन तय करने के साथ ही स्कूलोंं को स्पष्ट रूप से आदेश दिए हैं कि बस्ते का वजन किसी भी कीमत पर तय मानक से अधिक नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर कार्रवाई की जाएगी। अब यह देखना है कि अप्रैल से शुरू हो रहे नए सत्र में स्कूल सरकार के आदेशोंं का कितना पालन करते हैं।

कमर और गर्दन के दर्द से जूझ रहे हैं बच्चे
रोजाना सुबह-शाम भारी भरकम बैग लेकर स्कूल जाने वाले तमाम बच्चे कमर और गर्दन के दर्द से जूझ रहे हैं। माता-पिता बच्चों का हड्डी रोग विशेषज्ञ और फिजियोंथिरेपिस्ट से इलाज करवा रहे हैं। भारी बैग पर रोक लगाने की मांग बरसोंं से चली जा रही है। प्रोफेसर यशपाल कमेटी ने इसकी पुरजोर सिफारिश की थी। जो अब रंग लाती नजर आ रही है।

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