पूरी दुनिया में प्राकृतिक गैस की कीमतों में नरमी के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में भी सीएनजी और रसोई गैस की कीमतें कम हो सकती हैं। ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लि. एक अप्रैल से छह महीने की अवधि के लिए गैस के दाम में कटौती कर करीब 2.5 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट कर सकती हैं। फिलहाल यह 3.23 डॉलर प्रति यूनिट है। देश में उत्पादित गैस में इन दोनों कंपनियों की अच्छी-खासी हिस्सेदारी है।  सूत्रों के अनुसार कठिन फील्डों से उत्पादित गैस के दाम भी मौजूदा 8.43 डॉलर प्रति यूनिट से कम कर 5.50 डॉलर प्रति यूनिट की जा सकती है।
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प्राकृतिक गैस के दाम हर छह महीने पर बदलते हैं और इसके लिए एक अप्रैल और एक अक्टूबर की तारीख तय है। गैस की दर से जहां यूरिया, बिजली और सीएनजी की कीमतें तय होती हैं, वहीं इससे ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) जैसी गैस उत्पादकों की आय भी निर्धारित होती है। इससे पहले, प्राकृतिक गैस की कीमत में एक अक्तूबर को 12.5 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इसके तहत दर 3.69 डॉलर प्रति यूनिट से कम कर 3.23 डॉलर प्रति यूनिट किया गया। वहीं कठिन क्षेत्रों से उत्पादित गैस के लिये कीमत उच्चतम स्तर 9.32 डॉलर प्रति यूनिट से घटाकर 8.43 डॉलर प्रति यूनिट किया गया।

गैस की कीमतों में कटौती से ओएनजीसी जैसी कंपनियों की आय कम होगी लेकिन इससे सीएनजी के दाम भी कम होंगे। साथ ही घरों में पाइप के जरिये पहुंचने वाली रसोई गैस और उर्वरक तथा पेट्रोरसायन की लागतें भी कम होंगी। गैस के दाम में एक डॉलर प्रति यूनिट के बदालाव से यूरिया की उत्पादन लागत करीब 1,600 से 1,800 रुपये प्रति टन का बदलाव आता है।

आप पर भी होगा कीमतें कम होने का असर
प्राकृतिक गैस का उपयोग उर्वरक और बिजली उत्पादन में किया जाता है। साथ ही उसका उपयोग वाहनों में ईंधन (सीएनजी) के रूप में और घरों में पाइप के जरिये खाना पकाने की गैस (पीएनजी) में होता है। ऐसे में प्राकृतिक गैस की कीमत घटने पर सीएनजी, पीएनजी और उर्वरक के साथ बिजली भी सस्ता हो सकती है।

सरकार और कंपनियों की जेब होगी हल्‍की
सूत्रों ने कहा कि दाम में कटौती से देश की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी ओएनजीसी की कमाई करीब 3,000 कम होगी। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी भागीदार बीपी की आय भी प्रभावित हो सकती है जो दूसरे चरण में पूर्वी अपटीय क्षेत्र में केजी-डी6 ब्लाक में खोजे गये फील्ड से 2020 के मध्य से उत्पादन की योजना बनाई है। कीमत में कटौती से सरकार की सब्सिडी में 2020-21 की पहली छमाही में 800 करोड़ रुपये की कमी आएगी।

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